जनवरी २६, २०१९
देशके भिन्न-भिन्न भागोंमें कट्टरपंथका प्रसार करनेके लिए आतंकी समूह कोटि रुपये व्यय कर रहे हैं । जांच विभाग ‘एनआईए’को ‘एफआईएफ’ और आईएस प्रेरित आतंकी समूह ‘हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम’ प्रकरणमें पकडे गए लोगोंसे एक बात साझा मिली है कि कट्टरपन्थको आतंकी समूह अपनी शक्ति बनानेका प्रयास कर रहे हैं ।
कट्टरपन्थी विचारधारा प्रसारित करनके लिए भिन्न-भिन्न माध्यमोंका प्रयोग किया जा रहा है । मदरसों, धार्मिक स्थानोंके अतिरिक्त आधुनिक संचार माध्यमों, ऑनलाइन माध्यमोंका उपयोगकर कट्टरताके बीज बोए जा रहे हैं । जांच विभागका मानना है कि कट्टरपन्थी विचारधाराका प्रसार करनेके पश्चात युवाओंको आतंकवादके फेरमें उलझाना सरल हो जाता है । जांच विभागकी दृष्टि मस्जिद, मदरसोंके नामपर विदेशोंसे आनेवाले धनपर है ।
विभागसे जुडे सूत्रोंने कहा कि कट्टरपन्थ बडी चुनौती बन रहा है । उत्तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान, केरल, जम्मू कश्मीरतक भिन्न-भिन्न प्रकरणमें पकडे गए लोगोंसे यह जानकारी मिली है कि कट्टरताके लिए आतंकी समूह वित्तपोषण (फंडिंग) कर रहे हैं । हवालाकेद्वारा (अवैध लेन-देनकेद्वारा) पहुंचाई जा रही धनराशिका उद्देश्य यह है कि युवाओंको कट्टरपन्थमें झोंककर उन्हें जेहाद और इस्लामिक देशके नामपर आतंकवादके लिए प्रेरित किया जाए । युवाओंको कट्टरपन्थसे जुडे साहित्य वितरणकर, वीडियो दिखाकर, धार्मिक शिक्षाके नामपर और सामाजिक प्रसार माध्यमोंपर भ्रमित किया जा रहा है ।
विभागसे जुडे सूत्रोंने कहा कि गत एक-दो वर्षोंमें कश्मीरमें ‘वहाबी विचारधारा’ तीव्रतासे अपना प्रभाव दिखा रही है । सऊदी अरबसे कट्टरपन्थी मौलवी यहां आए हैं । मस्जिदोंमें कट्टरपन्थी शिक्षा दी जा रही है । इसीप्रकार पश्चिमी उत्तरप्रदेशके कई क्षेत्रोंमें मदरसे व मस्जिदोंको कट्टरपन्थका केन्द्र बनानेका प्रयास हुआ है । केरलमें ‘आईएस’के नामपर कट्टरताका प्रसार करनेका प्रयास तीव्र हुआ है । ‘फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन’के आतंकी वित्तपोषण प्रकरणमें जयपुरसे पकडे गए मोलानीसे भी उजागर हुआ कि कट्टरताके लिए बडे स्तरपर धन व्यय किया जा रहा है । इसी आईएस प्रेरित समूह ‘हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम’में पकडे गए कई युवा कट्टरपन्थके प्रभावसे आतंकी समूहसे जुडनेको सज्ज हुए ।
जांच विभागसे जुडे सूत्रोंने कहा कि इस नूतन संकटसे निपटनेके लिए इसको चिह्नित करनेकी भी आवश्यकता है । धार्मिक संस्थानोंके अतिरिक्त ऑनलाइन स्रोतपर देखरेख की जा रही है ।
“सब कुछ ज्ञात होते हुए कि मस्जिदें और मदरसे आतंक प्रसारित कर रहे हैं, इनपर प्रतिबन्ध न लगाना, यह विस्फोटकसे खेलनेके समान है । ऐसी विचारधाराका तुष्टिकरण क्यों करना, जो आतंकको पोषित करती हो और जिसमें केवल हानि ही हानि हो । क्या करेंगें हम ऐसी भ्रामक धर्मनिरपेक्ष छविका जो राष्ट्रको ही ले डुबे ! क्यों हम स्वीकार नहीं कर सकते कि आतंकका भी धर्म है ? अन्य राष्ट्र जो इस संकटका अनुमान लगा चुके हैं, वे सीधा प्रतिबन्ध कर रहे हैं तो हम दृष्टि रखनेमें समय क्यों व्यर्थ कर रहे हैं ? शासन सर्वप्रथम सभी मदरसोंको अवैध व आतंकी केन्द्र घोषितकर उन्हें प्रतिबन्धित करें, तदोपरान्त सभी मस्जिदोंकी जांचकर कार्यवाही करे, क्योंकि मस्जिदोंके भी आतंक समर्थन होनेके कई प्रकरण उजागर हुए हैं, यही राष्ट्रहितमें है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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