आगामी हिन्दू राष्ट्र कैसा होगा ?


हिन्दू राष्ट्र राम राज्य समान होगा और रामराज्यका वर्णन करते हुए सन्त शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदासजीने रामचरितमानसमें लिखा है-

दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा॥

सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥१॥

अर्थ : ‘रामराज्यमें दैहिक, दैविक और भौतिक ताप किसीको नहीं व्यापते । सब मनुष्य परस्पर प्रेम करते हैं और वेदोंमें बताई हुई नीतियोंमें (मर्यादा) तत्पर रहकर अपने-अपने धर्मका पालन करते हैं ।

अर्थात आज जिस प्रकार समाज सभी प्रकारके तापोंसे झुलस रहा है, उस कालमें सभी साधनारत होनेके कारण सुखी और आनन्दी होंगे । उसी प्रकार धर्मपालन करनेके कारण सभी साधक प्रवृत्तिके होंगे एवं साम्प्रत काल अनुसार वहां चारों ओर हिंसा, रक्तपात, साम्प्रदायिक उत्पात इत्यादि नहीं होंगे ! सर्वत्र शान्ति एवं भाईचारा होगा ।

चारिउ चरन धर्म जग माहीं। पूरि रहा सपनेहुं अघ नाहीं॥

राम भगति रत नर अरु नारी। सकल परम गति के अधिकारी॥२॥

अर्थ : धर्म अपने चारों चरणोंसे (सत्य, शौच, दया और दानमें) जगतमें परिपूर्ण हो रहा है, स्वप्नमें भी कहीं पाप नहीं है । पुरुष और स्त्री सभी रामभक्तिके पारायण हैं और सभी परमगतिके (मोक्षके) अधिकारी हैं ।

हिन्दू राष्ट्रमें सभी धर्मपारायण होंगे, सभी साधनाको प्राथमिकता देंगे; अतः ईश्वरीय कृपाके अधिकारी भी होंगे ।

इस प्रकार हिन्दू राष्ट्र एक आदर्श रष्ट्र होगा !



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