छत्तीसगढमें एक युवतीसे सामूहिक बलात्कार, दूसरीपर धर्मान्तरणका दबाव बनानेपर ‘एबीवीपी’ कार्यकर्ताओंद्वारा विरोध करनेपर बनाए गए बन्दी


१६ दिसम्बर, २०२०
छत्तीसगढमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषदके सदस्य इन दिनों दो आदिवासी अवयस्क लडकियोंको न्याय दिलानेके लिए निरन्तर पुलिस प्रशासनके विरुद्ध स्वर मुखरित कर रहे हैं । इस कारण इस छात्र सङ्गठनके कमसे कम १४ सदस्योंको बन्दी भी बनाया गया है । वहीं अन्य दशकाधिक लोगोंको भी पुलिसने बन्दी बनाया है । पुलिसका कहना है कि ‘एबीवीपी’के प्रदर्शनकारियोंने सामूहिक घेराव करते हुए अवरोधक (बैरिकेडिंग) तोडी थी; इसलिए उनके विरुद्ध कार्यवाही की गई ।
       प्रकरण राज्यके कवर्धा जनपदका है । छत्तीसगढके ‘एबीवीपी’ प्रदेश मन्त्री शुभम जैसवालने बताया कि सङ्गठनका प्रदर्शन २ प्रकरणोंको लेकर था । पहला, जिसमें एक १४ वर्षीय आदिवासी लडकीके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ और दूसरा १३ वर्षीय आदिवासी लडकी, जिसे बिना उसकी इच्छाके आंध्र प्रदेश गिरिजाघर भेज दिया गया ।
     शुभम पहले प्रकरणका वक्तव्य देते हुए कहते हैं कि पिछले दिनों २२ नवम्बर २०२० को १४ वर्षकी एक आदिवासी बच्चीका सामूहिक बलात्कार हुआ था । उस लडकीने मध्य रात्रि रक्तसे लथपथ स्थितिमें थाने पहुंचकर प्राथमिकी प्रविष्ट करवाई थी; परन्तु उस परिवादपर (शिकायतपर) कार्यवाही करनेके स्थानपर यह कह दिया गया कि वह अपने प्रेमीके साथ घूमने गई थी ।
      अपने प्रदर्शनसे सम्बन्धित अन्य प्रकरणोंका वक्तव्य देते हुए जैसवाल जानकारी देते हैं कि ‘एबीवीपी’ १३ वर्षकी आदिवासी लडकीके लिए भी न्यायकी मांग कर रहा है, जिसे पिछले दिनों बहला-फुसलाकर उसके मां-बापसे दूर लाया गया और विश्वास दिलाया गया कि उसे नगरके नामी होली क्रॉस विद्यालयमें पढाएंगे; परन्तु यहांसे उसे आंध्र प्रदेशके एक गिरिजाघरमें भेज दिया गया और वहां उसपर दबाव बना कि लडकी ईसाई धर्म अपना ले ।
          धूर्त ईसाइयोंका यह बढता प्रभाव इस देशके लिए सङ्कट है । सभी हिन्दुओंको इनके विरुद्ध स्वर मुखर करना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया


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