अग्निहोत्रसे सम्बन्धित शंका समाधान (भाग-२)


मैं सन्ध्या समय अपने कार्यालयसे देरीसे आता हूं अर्थात मुझे घर आते-आते रात हो जाती है, ऐसेमें क्या मैं एक समयका अग्निहोत्र कर सकता हूं ?

अग्निहोत्रमें सूर्योदयके समय सूर्यका आवाहन होता है एवं सूर्यास्तमें समय उसका निस्तारण । एक समयके अग्निहोत्रका अर्थ हुआ कि आपने अपनी उपासनाको पूर्ण नहीं किया । किसी भी कर्मकाण्डमें जब हम देवी-देवताओंको आमन्त्रित करने हेतु आवाहन करते हैं तो उस अनुष्ठानके पश्चात उनकी विदाई भी करते हैं । उसी प्रकार अग्निहोत्रमें हम यदि प्रातःकाल सूर्यदेवके आगमनपर अग्निमें आहुति देते हैं, वैसे ही अस्त होते हुए सूर्यको भी आहुति देकर उनकी उस दिन हेतु विदाई कर कृतज्ञता व्यक्त करनेका विधान है । आपकी समस्याका एक समाधान सम्भव है । अग्निहोत्र दो प्रकारसे किया जा सकता है एक है व्यष्टि अग्निहोत्र अर्थात जिसमें मात्र एक ही व्यक्ति दोनों समयमें नियमित अग्निहोत्र करता है, दूसरा है समष्टि अग्निहोत्र । इसमें घर, प्रतिष्ठान या विद्यालय, गुरुकुल इत्यादिमें कोई भी एक व्यक्ति प्रातः एवं सन्ध्या समय विधि-विधानसे अग्निहोत्र करे ।
आपकी स्थितिमें यदि प्रातःकाल अग्निहोत्र करके कार्यालय चले जाते हैं तो आपकी पत्नी या बच्चे या घरका कोई भी सदस्य सन्ध्याकालीन अग्निहोत्रका सत्र कर सकते हैं; किन्तु एक समय आप करें और सन्ध्या समय वह घरमें कोई न करे, ऐसा नहीं होना चाहिए, यह शास्त्रविरुद्ध आचरण होगा । घरमें भी जो सदस्य आपके स्थानपर इसे करते हैं, उन्होंने भी इसे शास्त्र अनुसार ही करना चाहिए अर्थात यह न हो की सूर्यास्त ६.११ मिनिटपर है तो उसे कोई ६.३० मिनिटपर कर रहा है, इससे भी अग्निहोत्रका लाभ नहीं मिलेगा; इसलिए इस अनुष्ठानको आरम्भ करनेसे पूर्व अपने घरके सदस्य या सदस्योंकी सहमति लेना आवश्यक होगा । यदि वे नियम पालन नहीं कर सकते हैं तो आप अग्निहोत्र नहीं कर सकते हैं ।



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