बजरंग दल कार्यकर्ताके घरमें घुसे २५-३० जिहादी, पीठमें चाकू घोंपकर की हत्या


१२ फरवरी, २०२१
     देहलीके मंगोलपुरीमें बजरंग दल कार्यकर्ताकी हत्या होनेके पश्चात तनाव है । २५-३० लोगोंके समूहने बुधवार, १० फरवरीको घरमें घुसकर २६ वर्षीय रिंकू शर्मापर आक्रमण किया । वे अयोध्यामें राम मन्दिर निर्माणके लिए चलाए जा रहे धन संग्रह अभियानमें सक्रिय थे ।
समाचारके अनुसार, पुलिसने इस प्रकरणमें चार आरोपियोंको बन्दी बनाया है । इनका अभिज्ञान (पहचान) मोहम्मद इस्लाम, दानिश नसीरुद्दीन, दिलशान और दिलशाद इस्लामके रूपमें हुआ है ।
    रिंकू शर्मा पश्चिम विहार स्थित एक चिकित्सालयमें ‘लैब टैक्नीशियन’का कार्य करते थे और उनका पूरा परिवार बजरंग दलसे जुडा था । रिंकूके परिवारमें मां राधा देवी, पिता अजय शर्मा और भाई अंकित एवं मनु हैं ।
      यह बहुत ही चिन्ताका विषय है कि पहले मध्य प्रदेश, तदुपरान्त राजस्थान और अब देशकी राजधानी देहलीमें हत्या हुई है । हम कहां रह रहे हैं और हमारी सुरक्षा किसके भरोसे हैं ? तीनों घटनाओंमें एक ही प्रकारकी समानता है कि हिन्दू अपने आराध्य श्रीरामके मन्दिर निर्माणके लिए दान मांग रहे थे । बहुसङ्ख्यक अपने ही देशमें पिट रहे और हत्याएं हो रही हैं । देशके पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी सहित एक बडा वर्ग कहता है कि भारतमें मुसलमान सुरक्षित नहीं हैं और भयभीत हैं । यदि यह कथित ‘भयभीत’ मुसलमान इस प्रकारसे अपराध कर सकता है, तो कल्पना कीजिए कि यह निर्भय होकर क्या नहीं कर सकता है ? उपर्युक्त घटनासे सम्बन्धित यह भी सूचना है कि ‘गृहबन्दी’के समय रिंकू शर्माने अपने हत्यारे, इस्लामकी पत्नीके लिए दो बार रक्तदान भी किया था और उसीने इसका प्रतिफल हत्या के रूप में दिया !
      आशा है कि बहुसङ्ख्यक हिन्दू समाज अब तो निद्रासे जागेगा और इन घटनाओंका उपयुक्त ‘मंच’पर विरोध भी करेगा और अपनी सुरक्षाके लिए स्वयं भी पग उठाएगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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