ममता शासनका दुस्साहस, सवैंधानिक संस्थाको जांच करनेसे बाधित किया !


अगस्त २१, २०१८

‘कैग’को पश्चिम बंगाल शासनने राज्यकी वैधानिक-व्यवस्था सम्बन्धित व्यय और अन्य चीजोंकी जांच करने से मना कर दिया है !

कैगके ‘एकाउण्टेंट’ जनरल नमिता प्रसादने राज्यके गृह सचिव अत्रि भट्टाचार्यको पत्र लिखकर यह जानकारी दी है कि ‘कैग’ पश्चिम बंगालके ‘पब्लिक ऑर्डर’की जांच करना चाहता है । इसके अन्तर्गत वैधानिक व्यवस्था, अपराध नियन्त्रण, राज्यमें शस्त्रोंके अनुमतिपत्र आदिका ब्यौरा लेकर उसकी जांच की जाएगी । राज्य शासनने इसके लिए कितनी धनराशि ली है, कितनी धनराशि आवण्टित की है, कितना खर्च किया गया है और कहां-कहां, किस-किस मदमें किस प्रकारसे धनराशिका प्रयोग किया गया है, इन सबका लेखा ‘कैग’को देखना है । प्रथम राज्यके गृह विभागने इसे पूर्ण रूप से नकार दिया था; लेकिन अब एक बार पुनः ‘कैग’की ओर से यह प्रस्ताव दिया गया है ।

कैगकी ओर से राज्य सचिवालयको बताया गया है कि राजस्थान, केरल, असम एवं मणिपुरमें ‘पब्लिक ऑर्डर’से सम्बन्धित जांच की जा रही है । पश्चिम बंगाल शासन संविधानसे बाहर नहीं हैं ! ‘कैग’ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम बंगालकी ढाई हजार किलोमीटर अन्तरराष्ट्रीय सीमा है । ऐसे में यहां वैधानिक-व्यवस्थाका पालन किस प्रकार से किया जा रहा है, इसकी जांच आवश्यक है । इससे पूरे देशकी सुरक्षा जुडी हुई है । यद्यपि राज्यके गृह विभागके एक वरिष्ठ अधिकारीने कहा कि राज्यकी वैधानिक-व्यवस्थामें कैगको किसी स्थितिमें नहीं घुसने दिया जाएगा ! इस गोपनीय और संवेदनशील विषयको ‘कैग’से साझा करनेका प्रश्न ही नहीं उठता है ! इस पर ‘कैग’के एक वरिष्ठ अधिकारीने कहा कि हम देशके परमाणु कार्यक्रमों एवं सेनाके जहाजोंके क्रय-विक्रय सम्बन्धी बडे मामलोंकी भी जांच करते है, तो क्या पश्चिम बंगाल शासनकी व्यवस्था उससे भी ऊंची चीज है ? कैगने स्पष्ट कर दिया है कि यदि राज्य शासन इस पर संविधानकी सीमामें सहयोग नहीं करती है तो इसके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाएगी !

पूर्व न्यायाधीश अशोक गांगुलीका कहना है कि संविधानके अन्तर्गत हर प्रकारकी सरकारी संस्थाओंके व्ययकी जांच कैग कर सकता है । किसी भी प्रकारकी ऐसी संस्था जिसे शासकीय रूपसे सहायता राशि दी जाती है, कैगकी सीमामें आती है । उनका कहना है कि व्यवस्था भले ही राज्य शासनका उत्तरदायित्व है, लेकिन पूर्ण रूपसे नहीं । पुलिसके आधुनिकीकरणके लिए केन्द्र शासन धनराशि देता है । राज्यमें आइपीएस अधिकारियोंकी तैनाती राष्ट्रपतिकेद्वारा होती है । किसी प्रकारका दंगा अथवा विस्फोट जैसी घटनाएं होने पर राज्य प्रशासन किस प्रकारसे कार्य करता है, यह देखनेका पूर्ण अधिकार ‘कैग’को है ।

पश्चिम बंगालकी दुर्दशा करने वाली ममता सरकारको किस बातका भय है ? ‘कैग’ने वैधानिक कार्यवाही कर अवश्य कडी जांच करनी चाहिए ! – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : दैनिक जागरण



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