भावजागृति हेतु किए जानेवाले प्रयास (भाग – ६)


व्यष्टि और समष्टि प्रार्थनाके कुछ उदाहरण भाग – १
कल हमने व्यष्टि और समष्टि प्रार्थनाके विषयमें जानकारी प्राप्त की थी । आज हम एक  सुप्रसिद्ध समष्टि प्रार्थनाके विषयमें जानेंगे ।
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु  निरामया ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत् ।।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

अर्थ : सब सुखी हों । सब निरोगी हों । सभी शुभ घटनाओंके साक्षी बनें । किसीको भी दुःखका भागी न बनना पडे । सर्वत्र शान्ति व्याप्त रहे ।
उपनिषदकी यह प्रार्थना विश्व कल्याणके भावसे ओत-प्रोत है । इसे प्रतिदिन पूजा करते समय करनेसे समष्टि साधना होती है एवं हमारे भीतर व्यापकता निर्माण होती है । विद्यालय, कार्यालय इत्यादिमें यह प्रार्थना नित्य करवानी चाहिए और इसका अर्थ भी सभीको ज्ञात होना चाहिए, इससे एक तो हिन्दू धर्म कितना व्यापक है ?, यह ज्ञात होता है, दूसरा कि समष्टि साधनाका भाव हमारे वेद और उपनिषदमें अनादि कालसे अंगीकृत है ।



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