पदोंपर नियुक्तिसे पूर्व वैचारिक पृष्ठभूमिकी जांच आवश्यक, भाजपाने दिए भाजपा शासित राज्योंको निर्देश
१४ जून, २०२१
वर्तमानमें मध्य प्रदेश और उत्तराखंडमें मुख्यमन्त्री कार्यालयोंमें परामर्शदाताओंकी नियुक्तियां विवादका विषय बन गई थीं । मध्य प्रदेशके मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तराखंडके मुख्यमन्त्री तीरथ सिंह रावतद्वारा नियुक्त किए गए ‘मीडिया’ परामर्शदाता भाजपा और विशेषतः प्रधानमन्त्री मोदीके विरुद्ध भूतकालमें दिए गए अपने वक्तव्योंके चलते समर्थकोंकी दृष्टिमें आ गए ।
‘सोशल मीडिया’पर समर्थकोंद्वारा विरोध प्रविष्ट करनेके पश्चात इन दोनोंको अपने पदसे हटा दिया गया । इन दोनों प्रकरणोंमें हुई घटनाके उपरान्त दलने कठोर निर्देश दिए हैं कि लोगोंके ‘वैचारिक झुकाव’ एवं उनकी विचारधाराकी पृष्ठभूमिका मूल्याङ्कन करनेके पश्चात ही उनका चयन किया जाना चाहिए ।
विगत ८ जूनको, मध्य प्रदेशके मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहानके साथ पूर्वमें कार्य कर चुके तुषार अपने ‘ट्विटर’ खातेपर अपने ‘सोशल मीडिया पोस्ट’के कारण भाजपा समर्थकोंके क्रोधका शिकार हुए । तुषारने अपने ‘ट्विटर’ खातेपर भाजपा, हिन्दुओं और प्रधानमन्त्री मोदीके विरुद्ध अनेक आपत्तिजनक ‘ट्वीट’ किए थे ।
यह सुखद है कि भाजपाको अब सद्बुद्धि आई है; परन्तु यह दुर्भाग्यपूर्ण भी है कि इतने विलम्बसे आई है । केवल राज्य ही नहीं; अपितु केन्द्रकी संवैधानिक संस्थाओंमें, अभी भी अधिकांश हिन्दू विरोधी तथा वामपन्थी भरे पडे हैं । भारत शासन तथा भाजपा शासित सभी प्रदेशोंसे इन्हें तत्काल पदच्युतकर राष्ट्रहितका विचार करनेवाले व्यक्तियोंकी नियुक्ति की जानी चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : डू पॉलिटिक्स
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