ब्राह्मणों! मद्यपान करना ही हो तो पुरोहिताई छोड दें !


मैंने पाया है कि आजकल कुछ ब्राह्मण जो कर्मकाण्ड करते हैं वे मद्यपान करते हैं ! दो वर्ष पूर्व मैं दिसम्बरके माहमें काशी गई थी ! वहांके ज्योतिर्लिंगके दर्शनसे निकलकर जब हम मंदिर प्रांगणमें स्थित कुंवेकी प्रदक्षिणा लगा रहे थे तो वहीं बैठे एक पण्डेने हमारे एक सम्भ्रान्त वर्गके साधकको अधिक दक्षिणा देने हेतु पकड लिया ! जब मैं वहां निकट गई तो प्रातः सात बजे उसके मुखसे मद्यकी दुर्गन्ध पाकर मैं हथप्रभ थी ! उसके स्वर लडखडा रहे थे नेत्र बिलकुल लाल थे और वह अधिक दक्षिणा देने हेतु हमारे साधकको जैसे बाध्य कर रहे थे ! ऐसे ही मूर्ख पण्डोंकी नितिशून्यताका कारण बताकर इस देशकी निधर्मी शासनने न जाने कितने ही मंदिरोंका शासकीयकरण (सरकारीकरण) कर उसकी भूमि और कोषागारमें स्थित आगाध धनको अपने नियन्त्रणमें ले लिया है ! ऐसे पण्डे पण्डितके रूपमें डकैत हैं यह कहनेमें मुझे अंशमात्र भी संकोच नहीं है, यदि उन्हें बन्दूक दे दिया जाए तो वे बन्दूककी नोकपर दक्षिणाके नामपर भक्तोंके सब पैसे छीन लें ! मैं आपको पिछले २६ वर्षके धर्मप्रसारके कालमें ऐसे सभी पण्डोंके विषयमें बताउंगी जिससे अन्य पण्डे यह जान सकें कि उनके अनुचित कृत्योंके ऊपर भी स्वर मुखरित करनेवाला कोई है ! इस मद्यपी पण्डेसे हमने बडी कठिनाईसे अपना पीछा छुडाया ! ऐसे सभी लोभी और दम्भी पण्डितोंसे मैं कहना चाहती हूं कि हमारा धर्मशास्त्र मद्यपी (शराबी) ब्राह्मणोंको कोई भी धार्मिक अनुष्ठानको (वाम मार्गीको मात्र तान्त्रिक अनुष्ठान करनेका अधिकार होता है) करनेकी अनुमति नहीं देता है और उसे शास्त्रोंमें चाण्डाल ब्राह्मण कहा गया है ! मैंने अपने शोधमें पाया है कि वर्तमान कालमें १० % पण्डित और पण्डे मद्यपान कर, कर्मकाण्ड कराते हैं ! मेरी घ्राण शक्ति बहुत ही तीक्ष्ण है, मुझे मद्यका दूरसे ही गन्ध लगता है !     ऐसे ही अक्टूबर २०१५ में देहलीमें मैं एक साधकके पुत्रके जन्मदिनके उपलक्ष्यमें कराए गए होममें उपस्थित थी ! तीन विप्रगण मिलकर वह हवन करवा रहे थे, यज्ञ छतपर हो रहा था और उस साधक दम्पतीने सारा अनुष्ठान बहुत भावसे आयोजित कराया था; किन्तु जब मैं हवन हेतु उन पण्डितोंके पास बैठी तो उनके मुखसे मद्यके दुर्गन्धको प्पाक्र क्षुब्ध हो गई और उसके दुर्गन्धके कारण मैं अधिक देरतक वहां बैठ ही नहीं पाई | उस साधक दम्पतीने मुझसे पूछकर ही होमका कार्यक्रम रखवाया था और मैंने उन्हें ब्राह्मण देवता स्वरुप होते हैं, यह भाव रखकर उनके लिए पर्याप्त दक्षिणा, फल, वस्त्र सबकी व्यवस्था कराई थी ! मैं उस समय बहुत ही असमंजस्यकी स्थितिमें थी, एक बार तो विचार आ रहा था कि सबके समक्ष उनके इस कुकर्मको उजागर कर, उनकी अच्छेसे धुलाई कर पुलिसको सौंप दिया जाए; किन्तु मैंने उस नव-दम्पतीके मनमें विप्रवर्गके लिए सदैवके लिए आस्था टूट जाएगी यह सोचकर चुप रही ! ऐसे सभी अधर्मी पण्डितोंको इस लेखके माध्यमसे यह बताना चाहती हूं कि धर्मस्थानपर बैठकर ऐसे पाप कर्म करनेसे आपको अगला जन्म मनुष्यका तो निश्चित ही नहीं मिलेगा, मृत्यु उपरान्त ही भीषण नरक यातना सहन करनी पडेगी, इस बातका अच्छेसे ध्यान रखें ! मद्य इस जन्ममें इसी संसारमें आपकी सारी साधनाको भी नष्ट कर देगा | अतः मद्यपान करना ही हो तो पुरोहिताई छोड दें ! स्वयंको धोखा देकर अपने लिए नरकका द्वार न खोलें !



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