संस्कृतनिष्ठ हिंदी

हिन्दुओ ! अपने उपनामको शुद्ध लिखनेका प्रयास करें !


आजकल अनेक लोग अपने उपनामको अनुचित पद्धतिसे लिखते हैं जैसे मिश्रको मिश्रा, गुप्तको गुप्ता, सचदेवको सचदेवा, पण्डितको पण्डिता, शुक्लको शुक्ला, श्रेष्ठको श्रेष्ठा, मालवीयको मालवीया इत्यादि । अपने नाम और उपनामको शुद्ध लिखनेका प्रयास करें, यह भी अब हिन्दुओंको बताना पडता है ।  

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स्वयंका नाम व्याकरणदृष्टया शुद्ध लिखें !


हिन्दू व्यक्तियोंके नाम देवताओंके नामपर अथवा कोई अच्छा अर्थ व्यक्त करनेवाले होते हैं । यह नाम लिखते समय व्याकरणकी दृष्टिसे शुद्ध लिखनेसे सात्त्विकता आती है तथा ईश्वरीय तत्त्व आकृष्ट होता है; इसलिए प्रत्येकको स्वयंका नाम व्याकरणकी दृष्टिसे शुद्ध लिखना चाहिए । उदा. ‘निलेश’ न लिख ‘नीलेश’ लिखें या ‘दिपक’ न लिख दीपक’ लिखें; ‘स्वयंका नाम […]

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अनुनासिक शब्दमें चन्द्रबिन्दुका उपयोग न करें !


हिन्दी भाषामें उर्दूका अनुकरण करते हुए चन्द्रबिन्दुका प्रयोग किया जाने लगा है, यह भी हिन्दीकी सात्त्विकताको घटाता है । हिन्दी भाषाका जन्म संस्कृतसे हुआ है और संस्कृतमें चन्द्रबिन्दुका प्रयोग नहीं किया जाता है, केवल बिन्दुका प्रयोग किया जाता है, इस दृष्टिसे भी हिन्दीमें चन्द्रबिन्दुका प्रयोग अनुचित ही है । चन्द्रबिन्दु अनुनासिकका प्रयोग करते समय लगाया […]

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क्या अब हिन्दी भाषासे अवैदिक शब्दोंको निकालना सम्भव है ?


एक व्यक्तिने कहा, “आज हिन्दी भाषामें एक नहीं अनेक उर्दू शब्द, प्रचलित हो चुके हैं, ऐसेमें उसे हम कैसे निकाल सकते हैं ? इसका उत्तर इस प्रकार है : यदि हमने अत्यधिक श्रम कर कोई घर बनाया हो और जाने-अनजाने कोई अवांछित व्यक्ति हमारे घर घुस आए और वह, वहां अपना अधिकार प्रदर्शित करे, तो […]

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कारकचिह्नका प्रयोग शब्दके साथ करें !


व्याकरणके सन्दर्भमें, किसी वाक्य, मुहावरे अथवा वाक्यांशमें संज्ञा या सर्वनामका क्रियाके साथ सम्बन्ध कारक कहलाता है । जैसे ने, से, में, का, के, की, को, पर, द्वारा, वाला आदि । यह शब्दोंके उपरान्त आता है, जैसे ‘गायको’, ‘पानीसे’, ‘शिवका’, ‘समुद्रमें’ आदि । प्रचलित हिन्दीमें इन्हें शब्दसे पृथक लिखा जाता है; परन्तु बोला साथमें जाता है […]

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बिन्दुका (नुक्ताका) प्रयोग हिन्दी भाषामें न करें |


हिन्दी भाषामें उर्दू समान कुछ शब्दोंके नीचे बिन्दु अर्थात नुक्ता लगानेसे हिन्दीकी सात्त्विकता घट जाती है । उदाहरण हज़ार, पकड़, पढ़ाई आदि । संस्कृत देवभाषा है, संस्कारोंकी भाषा है तथा हिन्दी भाषाकी जननी है; अतः संस्कृत समान ही हिन्दीमें भी शब्दोंके नीचे बिन्दु (नुक्ता) नहीं दिया जाना चाहिए ! वेदोंमें शब्दोंके नीचे बिन्दुका प्रयोग नहीं […]

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सात्त्विक हिन्दी सीखें और लिखें !


वर्तमान कालमें प्रायः हम हिन्दी बोलते अथवा लिखते समय सहज ही उर्दू एवं अन्य विदेशी भाषाओंसे उद्धृत शब्दोंका प्रयोग करते रहते हैं । वैदिक संस्कृति सत्त्व गुण आधारित है एवं संस्कृतनिष्ठ हिन्दी ही सात्विक भाषा है। उर्दू एवं अन्य विदेशी भाषाओंसे उद्धृत शब्दोंका प्रयोग करनेसे हमारी हिन्दी भाषाकी सात्त्विकता नष्ट होती जा रही है; अतः […]

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आजकी पत्रकारिताद्वारा किया जा रहा है व्यापक स्तरपर हिन्दी भाषाका विकृतीकरण


हम आपके समक्ष कुछ दिवसों हिन्दी समाचार पत्रों या जालस्थानोंके सामयिक समाचारके अंशकी कुछ पंक्तियां प्रस्तुत कर रहे हैं,  आप स्वयं देखें कि इन सभी ‘बुद्धिजीवी पत्रकारों’ने किस प्रकार भारतमें हिन्दी भाषाके ‘विकृतिकरण’का उत्तरदायित्व ले रखा है |

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अवैदिक शब्द —– संस्कृतनिष्ठ शब्द


अवैदिक शब्द – संस्कृतनिष्ठ शब्द ज्यादा – अधिक दहसत – ताण्डव असली – यथार्थ/ खरा मतलब – अर्थ मकसद – उद्देश्य इस्तेमाल – उपयोग आसानी – सरलता जगह – स्थान कत्ल – हत्या हालांकि – यद्यपि हालत – स्थिति निगाह – दृष्टि उम्मीद – आशा ख्वाब – स्वप्न जहर – विष उम्र – आयु दौरान […]

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