शिवनामतरीं प्राप्य संसाराब्न्धि तरन्ति ते । संसारमूलपापानि तानि नश्यन्त्यसंशयम् ।। संसारमूलभूतानां पातकानां महामुने । शिवनामकुठारेण विनाशो जायते ध्रुवम ।। शिवनामामृतं पेयं पापदावानलार्दितै । पापदावाग्नितप्तानां शान्तिस्तेन विना न हि ।। शिवेति नामपीयूषवर्षाधारापरिप्लुताः । संसारदवममध्येऽपि न शोचन्ति कदाचन ।। शिवनाम्नि महभ्दक्तिजार्ता येषां महात्मनाम् । तव्दिधानां तु सहसा मुक्तिर्भवति सर्वथा ।। ( शि. पु. २३।२९-३३) अर्थ […]
प्राणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती धिनामवित्र्यव्तु अर्थ : हे मां सरस्वती ! आप विद्यादात्री हैं, गूढ, अनंत एवं अद्भुत विज्ञानसे विभूषित हैं । हे बुद्धिके रक्षण करनेवालीं आप हमारी बुद्धिका रक्षण करें !
अभीप्सितार्थसिद्ध्यर्थं पूजितो यः सुरासुरैः । सर्वविघ्नहरस्तस्मै गणाधिपतये नमः ।। अर्थ : उन श्री गणेशको नमन है जिनकी उपासना देवता और असुर दोनों ही अपनी इच्छाओंकी पूर्ति और सर्व विघ्नोंके नाश हेतु करते हैं ।
अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते । भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥ सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥ अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमलय शृङ्गनिजालय मध्यगते […]
एकदंतं महाकायं तप्तकाञ्चनसन्निभम् । लंबोदरं विशालाक्षं वन्देऽहं गणनायकम् ।। अर्थ : उन गणपतीको हम वंदन करते हैं जिनके एकदंत हैं जो विशाल देहवाले हैं, जो लंबोदर , जिनके विशाल नयन है और जिनका वर्ण तपे हुए स्वर्णके समान है ।
प्रातर्नमामि गिरिशं गिरिजार्धदेहं सर्गस्थितिप्रलयकारणमादिदेवम् । विश्वेश्वरं विजितविश्वमनोभिरामं संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥ अर्थ : उन गिरीशको (शिव) मैं प्रातः नमन करती हूं, जिनके अर्ध भागमें देवी गिरिजा (पार्वती) विराजती हैं, जो उत्पत्ति, स्थिति और लय तीनोंके मूल कारण हैं जो विश्वेश्वर हैं और सम्पूर्ण विश्वको अपने मनोरमतासे जीत लेते हैं, जो अपने औषधिसे सांसरिक बंधन रूपी रोगका नाश […]
अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम । तस्मात्कारुण्यभावेन रक्षस्व परमेश्वर ।। अर्थ : आपके सिवा मेरे और कोई आधार नहीं , हम आपके शरणागत हैं । अतः हे परमेश्वर अपनी करुणा बरसा कर मेरी रक्षा करें !
लाभस्तेषां जयस्तेषां कुतस्तेषां पराजयः । येषामिन्दीवरश्यामो हृदयस्थो जनार्दनः ।। अर्थ : जिनके हृदयमें श्याम रंगके पद्म स्वरूपी जनार्दनका वास है, उन्हें सदैव यश (लाभ) मिलता है , उनकी सदैव जय होती है, उनका पराजय कैसे संभव है !
सर्वदा सर्वकार्येषु नास्ति तेषाममङ्गलम् । येषां हृदिस्थो भगवान् मङ्गलायतनो हरिः ।। अर्थ : जिसके हृदयमें श्रीहरी हों, जो स्वयं मंगलायातन हैं, एवं उनका वास हो उनके सदैव एवं सभी कार्य निर्विघ्न और मंगलकारी होते हैं ।
यन्मायावशवर्ति विश्वमखिलं ब्रह्मादिदेवासुरा यत्सत्त्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथाहेर्भ्रमः। यत्पादप्लवमेकमेव हि भवाम्भोधेस्तितीर्षावतां वन्देऽहं तमशेषकारणपरं रामाख्यमीशं हरिम्॥ अर्थ : जिनकी मायाके वशीभूत सम्पूर्ण विश्व, ब्रह्मादि देवता और असुर हैं, जिनकी सत्तासे रस्सीमें सर्पके भ्रमकी भाँति यह सारा दृश्य जगत् सत्य ही प्रतीत होता है और जिनके केवल चरण ही भवसागरसे तरनेकी इच्छावालोंके लिए एकमात्र नौका हैं, उन […]