आयुर्वेद

घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा – उज्जायी प्राणायाम (भाग-२)


उज्जायी प्राणायाम करनेकी विधि : इसमें दोनों नासिकाओंसे धीरे-धीरे सांस ली जाती है और जब सांस छोडी जाती है तो दाईं नासिकाको बन्दकर बाईं नासिकासे श्वासको धीरे-धीरे निकाला जाता है । जब दोनों नासिकासे श्वास ली जाती है तो गर्दनके ‘थाइराइडवाले’ भागको कम्पन कराके ‘ॐ’की ध्वनि उत्पन्न की जाती है । यह ध्वनि उज्जायी प्राणायामकी […]

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घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा – उज्जायी प्राणायाम (भाग-१)


हमारे सुप्रसिद्ध वैदिक षड्दर्शनोंमें तो ‘योगदर्शन’ एक स्वतन्त्र दर्शन है । योगका उल्लेख वैसे तो वेदोंमें भी मिलता है अर्थात योगका विज्ञान, योगका शास्त्र अति प्राचीन है । यह हमारी संस्कृतिका अविभाज्य अङ्ग है ।    परम्परानुसार योगदर्शनके प्रणेता महर्षि पतञ्जलिको भगवान श्रीशेषका अवतार माना जाता है । अठारहवीं शताब्दीके पण्डित श्रीरामभद्र दीक्षितजीके ‘पतञ्जलिचरित’ नामक […]

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घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा – शीतली प्राणायाम (भाग-३)


शीतली प्राणायामसे होनेवाले अन्य लाभ  अधिक तृष्णाको (प्यासको) घटाए : कभी-कभी व्यक्तिको आवश्यकतासे अधिक ‘प्यास’ लगने लगती है जो हमारे लिए हानिकारिणी सिद्ध हो सकती है । यदि हम शीतली प्राणायामका अभ्यास नियमित रूपसे करते हैं तो यह कुछ ही दिनोंमें शरीरमें हुई पानीके अभावकी समस्याको ठीक कर देता है । मुखपर चमक बने : […]

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घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा – शीतली प्राणायाम (भाग-२)


शीतली प्राणायामसे होनेवाले लाभ :  ‘गर्मी’में लाभदायक : जब इस प्राणायामका अभ्यास किया जाता है तो यह हमारे शरीरसे उष्ण (गर्म) वायुको निकालकर उसमें शीतल वायुका प्रवेश कराता है, जिससे हमारे शरीरसे उष्णता बाहर निकल जाती है और पूरा शरीर ठण्डा हो जाता है । पाचन क्रियामें लाभदायक : इस प्राणायामके अभ्याससे पाचन क्रियाको ठीक […]

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घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा – शीतली प्राणायाम (भाग-१)


शीतली  प्राणायाम दो शब्दोंसे मिलकर बना है शीतली + प्राणायाम = शीतली प्राणायाम जहांपर शीतलका अर्थ होता है ठण्डक । कहनेका अर्थ यह है कि इस प्राणायामको करनेसे शरीरको ठण्डक मिलती है; इसलिए इसे शीतली प्राणायाम कहा जाता है । इसको अंग्रेजी भाषामें ‘कूलिंग ब्रेथ’ भी कहा जाता है । यह प्राणायाम हमारे शरीरके लिए […]

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घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा – कपालभाति प्राणायाम (भाग-४)


कपालभाति प्राणायामके कुछ अन्य लाभ व सावधानियां  * समयसे पहले बालोंका पकना या बालोंका अधिक झड जाना, आवश्यकतासे अधिक निद्रा आना या अनिद्रा अथवा अल्प नींद आना इत्यादि, इन सभी समस्याओंको कपालभाति योगके द्वारा जडसे उखाडा जा सकता है । * कानोंसे न्यून (कम) सुनाई देना, अपस्मार (मिर्गी), नाकके अन्दर फोडे होना आदि समस्याएं भी […]

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घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा – कपालभाति प्राणायाम (भाग-३)


कपालभाति प्राणायामके लाभ * कपालभातिका मुख्य गुण यह है कि इसको करनेसे शारीरिक लाभके साथ-साथ आध्यात्मिक लाभ मिलता है । साथ ही यह मनकी एकाग्रताको भी बढा देता है और कपालभाति करनेवाला व्यक्ति स्वस्थ रहता है । * मानसिक तनाव व अवसाद (Depression) और श्वासरोग (दमा) कपालभाति करनेसे दूर हो जाते हैं । चंचल मनवाले […]

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घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा – कपालभाती प्राणायामद्वारा चिकित्सा (भाग-२)


* कपालभाति प्राणायाम दिनमें प्रातः, सूर्योदयसे पूर्व करनेपर अधिक लाभ होता है । इस प्राणायाम अभ्यासको आरम्भ करनेवाले व्यक्तिको दोसे तीन मिनटमें थकानका आभास हो सकता है; परन्तु एक या दो सप्ताहके अभ्यासके पश्चात कोई भी सामान्य व्यक्ति सतत पांच मिनटसे अधिक समयतक कपालभाति प्राणायाम करनेके लिए सक्षम हो जाता है । * कपालभाति प्राणायाम […]

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घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा (भाग-६)


कपालभाति प्राणायाम यह एक सरल प्राणायाम है । ‘कपाल’ अर्थात माथा और भातिका अर्थ होता है, प्रकाश । कपालभाति प्राणायाम करनेसे व्यक्तिके मुखपर चमक आती है और इस प्राणायामसे कई प्रकारके जटिल रोग दूर होते हैं तथा स्वस्थ व्यक्ति इस अभ्यासको प्रतिदिन करता रहे तो वह जीवनभर नीरोगी रहता है ।   कपालभाति प्राणायाम, योगका […]

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घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा (भाग-५)


* प्रतिदिन प्रातः अनुलोम-विलोम प्राणायाम करनेसे शरीरमें ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’की समस्या नहीं होती है और यदि किसी व्यक्तिको पहलेसे ही यह समस्या हो तो अनुलोम-विलोम करनेसे दूर हो जाती है । * अनुलोम-विलोमसे शीतप्रकोप तथा निरन्तर नाक बहनेकी समस्या और श्वसन क्रियासे सम्बन्धित कोई भी जटिल रोग हो, तो वह दूर हो जाता है । * […]

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