आयुर्वेद

घरका वैद्य – नित्य कल्याणी (सदाबहार) (भाग-२)


कर्करोगमें (कैंसरमें) लाभप्रद : ‘सदाबहार’की पत्तियोंमें दो क्षाराभ (Alkaloid) पाए जाते हैं, विन्क्रिस्टाईन और विंब्लास्टाइन । ‘एलॉपथी’में इन दोनों नामोंसे इंजेक्शन भी आते हैं, जो मुख्यतः कर्करोगके रोगियोंको दिए जाते हैं । ये कर्करोगमें रसायनचिकित्साके ……

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घरका वैद्य – सदाबहार पुष्प (भाग – १)


सदाबहार एक झाडीनुमा पौधा होता है । इसके पत्ते गोल थोडी लम्बाई लिए अण्डाकार व अत्यन्त ही चमकदार व चिकने होते हैं ।  पांच पंखुडियोंवाला यह पुष्प श्वेत, गुलाबी, जामुनी आदि रंगोंमें खिलता है । इसके चिकने मोटे पत्तोंके ……

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घरका वैद्य – पाटल पुष्प (गुलाब) (भाग – ७)


** ‘गुलाबजल’ बनानेकी विधि : आधुनिक समयमें भिन्न-भिन्न प्रकारके संस्थानोंमें इसका निर्माण होने लगा है, जिससे यह सरलतासे मिल जाता है; परन्तु ‘गुलाबजल’ बनानेकी विधि अत्यन्त सरल है, जो आप घरपर भी कर सकते हैं । ‘गुलाब’जल बनानेके लिए तीन पदार्थोंकी आवश्यकता होती है – ‘गुलाब’की पंखुडियां, जल और हिम (बर्फ) । इसके लिए एक […]

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घरका वैद्य – पाटलपुष्प (गुलाब) (भाग-२)


मनको प्रसन्न रखने और सकारात्‍मक विचारको बढानेके लिए पाटलपुष्पकी पंखुडियोंका सेवनकर सकते हैं । कुछ मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि पाटलपुष्पकी पंखुडियोंका नियमित सेवनकर प्रसन्न, तनावमुक्‍त व सहज अनुभव किया जा सकता है । भोजनके साथ इनका …..

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घरका वैद्य – पाटलपुष्प (गुलाब) (भाग – १)


पाटलपुष्पको पुष्पोंका राजा बोला जाता है । पाटलपुष्प एक बारहमासी पौधेका पुष्प है, जो ‘Rosaceae’ कुटुम्बमें आता है । अधिकांश पाटलपुष्पकी तीन सौ प्रजातियां और सहस्रों प्रकार हैं । पाटलपुष्प श्वेत, पीले और लाल रंगके होते हैं ……

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घरका वैद्य – चमेली पुष्प (भाग – २)


रक्तपित्तके रोगमें : परवल, श्लेष्मातक, चौपतिया, चमेली, वटके अंकुर तथा निर्गुण्डी पत्तेके सागको घीसे बनाकर तथा आंवला व दाडिम (अनार) रस मिलाकर सेवन करनेसे रक्तपित्तमें लाभ होता है ……

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घरका वैद्य – चमेली पुष्प (भाग – १)


चमेलीके पुष्पके लाभ स्‍वास्‍थ्‍यके लिए महत्त्वपूर्ण होते हैं । प्रायः लोग चमेलीके तेलकी बाते करते हैं । चमेलीके पुष्पको ‘फूलोंकी रानी’के नामसे भी जाना जाता है । चमेलीका पौधा जैतूनके कुटुम्बसे सम्बन्धित है । विश्वमें चमेलीकी १५० से अधिक प्रजातियां हैं । चमेलीके पुष्पकी सुगन्धसे ……

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घरका वैद्य – कमल पुष्प (भाग-२)


श्वेत कमल केसरके पेस्टमें खाण्ड, शर्करा तथा मधु मिला लें ! इसको चावलके धुले हुए पानीके साथ सेवन करनेसे ‘पेचिश’ ठीक होता है ।
रक्त अर्शमें (खूनी बवासीरमें) : कमलका पुष्प लें, इससे केसर (डंडियां) निकाल लें ! चीनी तथा कमलके ……

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घरका वैद्य – कमल पुष्प (भाग-१)


कमलका पुष्प कीचडमें खिलता है और अत्यधिक सुन्दर होता है । कमलके पुष्पका प्रयोग प्रायः पूजा-पाठमें किया जाता है; परन्तु क्या आप जानते हैं कि कमलका फूल एक उत्तम औषधि भी है और रोगोंकी चिकित्सामें कमलके पुष्पके अनेक लाभ हैं ……

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घरका वैद्य – अखरोट (भाग-२)


अर्शके (बवासीरके) लिए : वातजन्य अर्शमें अखरोटके तेलके ‘फाहे’को गुदामें लगानेसे ‘सूजन’ अल्प होकर पीडा दूर हो जाती है । इसकी गिरी ५० ग्राम, छुहारे ४० ग्राम, और बिनौलेकी मींगी १० ग्राम, एक साथ कूटकर, थोडेसे घीमें भूनकर, उतनी ही मात्रामें देसी मिश्री मिलाकर रखें ! इसमें २५ ग्राम प्रतिदिन प्रातःकाल सेवन करनेसे प्रमेहमें विशेष […]

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