मुझसे एक व्यक्तिने कुछ दिन पूर्व कहा “आप बहुत कडक लिखती हैं, आपसे सब नहीं जुड पाएंगे !” मैंने कहा, “ कोई बात नहीं, अपने दहाडसे शत्रुओंकी भीतर भय निर्माण करनेवाले शेरोंकी टोली बनाने निकली हूं और जिनमें राष्ट्र व धर्मके प्रति प्रेम, निष्ठा एवं क्षात्रवृत्ति होगी वे मुझसे जुडेंगे ही । भीरु प्रवृत्तिके मेमने […]
वर्तमान समयमें कुछ व्यक्ति एवं कुछ संस्थाएं अहिंसक पद्धतिसे राष्ट्रद्रोहियों एवं धर्मद्रोहियोंके कुछ अनैतिक सिद्धान्त या उनके समाजद्रोही, राष्ट्रद्रोही एवं धर्मद्रोही कृत्योंका विरोध करने हेतु आमरण ‘अनशन’ करती हैं । अहिंसक पद्धतिसे अपने विचारको व्यक्त कर, विरोध करना यह सभ्य समाजका लक्षण है; परन्तु जब असभ्योंसे अपनी बात मनवानी हो तो साम, दाम, दण्ड, भेद, […]
अभीतक समाज हितार्थ जितनी भी भोगवादी निधर्मी सामाजिक एवं राजनीतिक पद्धतियां जैसे – पूंजीवाद, समाजवाद, मार्क्सवाद आईं और समाज व्यवस्थाका अंग बनीं, सभी कालके प्रवाहमें प्रभावहीन प्रमाणित हो गईं; अतः वैदिक सनातन धर्म आधारित ‘हिन्दू राष्ट्र प्रणाली’, जो प्राचीन कालसे ही अस्तित्वमें रही है, वह सबसे यशस्वी राष्ट्रीय व्यवस्था है, जो समष्टि हितार्थ भी सर्वोत्तम […]
राष्ट्र हम साधकोंका होगा तो नियम भी हम ही बनाएंगे, अमरीका और ब्रिटेनवालोंको आकर थोडे ही विधान बनाने दिया जाएगा ! और नूतन नियम बनानेकी आवश्यकता ही क्या है ? हमारे धर्मशास्त्रोंमें सर्व विधान पहलेसे ही हैं हमें तो मात्र उनके पालन करनेकी आवश्यकता है….
इस देशके राजनेताओं, प्रशासन एवं न्यायतन्त्रने एक बार यह अवश्य ही अन्तर्मुख होकर सोचना चाहिए कि हिन्दू बहुल राष्ट्रमें हिन्दुत्त्वनिष्ठोंको स्वयंसिद्ध होकर गोशालायें क्यों चलानी पडती हैं, क्यों उन्हें गोरक्षण हेतु प्रयास करने पडते हैं ?…….
इस देशको हानि अहिन्दुओंसे अधिक, मार्गसे भटके हुए जन्म हिन्दुओंने पहुंचाई है ! आजके अधिकांश नास्तिक, तथाकथित पुरोगामी, स्त्रीमुक्ति आन्दोलनके अग्रणी, नक्सलवादी, साम्यवादी, गोवंशके पधुवधगृह चलानेवाले, मुल्लों और ईसाईयोंका तुष्टिकरण करनेवाले एवं अनेक बार हिन्दू सन्तों एवं देवी-देवताओंकी विडम्बना करनेवाले इत्यादि भी हिन्दू होते हैं….
अनेक साक्ष्य होनेपर भी इस लोकतन्त्रमें राष्ट्रद्रोही और भ्रष्टाचारी चुनाव लडते हैं और यहांकी व्यवस्था उसके रोकनेमें असक्षम है, इससे बडी विडम्बना इस देशकी और क्या हो सकती है ?
इस देशमें देशद्रोहियों व धर्मद्रोहियोंको अपने विचारोंके विष वमन करनेकी स्वतन्त्रता है; किन्तु यदि कोई राष्ट्र और हिन्दू हित हेतु कुछ भी बोले तो उसे यहांका शासन तन्त्र कदापि सहन नहीं कर सकता है और परिणाम तो आप सबको पता ही है – कारागार या कार्यपर प्रतिबन्ध, मुझे भी फेसबुकपर प्रतिबन्धित किया गया है ! […]
इस देशको हानि अहिन्दुओंसे अधिक, मार्गसे भटके हुए जन्म हिन्दुओंने पहुंचाई है ! आजके अधिकांश नास्तिक, तथाकथित पुरोगामी, स्त्रीमुक्ति आन्दोलनके अग्रणी, नक्सलवादी, साम्यवादी, गोवंशके पधुवधगृह चलानेवाले, मुल्लों और ईसाईयोंका तुष्टिकरण करनेवाले एवं अनेक बार हिन्दू सन्तों एवं देवी-देवताओंकी विडम्बना करनेवाले इत्यादि भी हिन्दू होते हैं; इसीलिए हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनासे पूर्व इन सभी राष्ट्रद्रोही, धर्मद्रोही और […]
छोटी अवस्थामें मृत्यु नहीं होती, न किसीको कोई पीडा होती है । सभीके शरीर सुन्दर और निरोग हैं । न कोई दरिद्र है, न दुःखी है और न दीन ही है । न कोई मूर्ख है और न शुभ लक्षणोंसे हीन ही है….