पूर्व कालके राज्यकर्ता संतोंके मार्गदर्शनमें राज्यका कार्यभारका संचालन करते थे । आजके राज्यकर्ता संतोंके विरुद्ध षड्यंत्र रचकर, उन्हें निरपराध ही कारागृहमें डालकर राज्य करते हैं ! पूर्वकालमें राज्यकर्ता संतोंकों आश्रम बनाने हेतु भूमि एवं आश्रमके संगोपन हेतु धन एवं गायें दान करते थे, आजके राज्यकर्ता आश्रमको सील कर उसके भवनपर बुलडोजेर चलानेमें गर्व अनुभव करते […]
स्वामी विवेकानन्द विश्व धर्म सम्मेलनमें भाग लेने शिकागो (अमेरिका) गए थे । उनके भगवे वेशभूषाको देखकर एक विदेशी महिलाने उनका उपहास करते हुए पूछा, “यह क्या है ?” वे वाक्पटु तो थे ही, तपाकसे उत्तर दिया, “यह आपका देश है, जहां दर्जी और वेषभूषा आपके व्यक्तित्वका निर्माण करता है; परन्तु हमारे देशमें चरित्र, व्यक्तित्वका निर्माण […]
सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हजको ! आजकल मुंबई फिल्मी जगतके कुछ सुप्रसिद्ध अभिनेता एवं अभिनेत्रियां मुंबईमें हुए समूहिक बलात्कारके प्रति अपना रोष प्रकट करनेकी नौटंकी करते हुए दिखाई दे रहे हैं ! जिसे समाज अभिनयका देवता मान पूजता है ऐसे माननीय अमितम्भ बच्चनजी उसमें से एक हैं, क्या उनकी अंतरमात्मा तब मर चुकी थे […]
जिन हिन्दुओंको लगता है कि हिन्दू धर्म शाश्वत है; अतः हमें इसके संरक्षण हेतु कुछ भी करनेकी आवश्यकता नहीं, ऐसे हिन्दुओंको बता दें कि कभी बाली, जावा, सुमात्रा और अफगानिस्तान तक फैला यह हिन्दु बहुल जनसंख्यावाला आर्यावर्त, आज खण्डित भारतके आठ राज्यों एवं ६० से अधिक जनपदोंमें एवं अल्पसंख्यक हो गया है और यह मात्र […]
कुछ पाठक जानना चाहते हैं कि धर्म अधिष्ठित (धर्म निरपेक्ष नहीं अपितु धर्म सापेक्ष ) राज्य प्रणालीका क्या अर्थ है ? इस राज्य प्रणालीमें राज्यकर्ता खरे अर्थोंमें धर्माचरण करनेवाला क्षत्रिय (जन्म क्षत्रिय बल्कि कर्म क्षत्रिय) होगा वह ब्राह्मणके (आत्मज्ञानी संत) मार्गदर्शनमें राज्यपर शासन करेगा और ऐसी राज्य प्रणालीमें प्रजा सुखी और धर्मका अवल्मबन करनेवाली होगी […]
कुछ समय पूर्व एक स्वामीजीसे मिली थी । स्वामीजी कुछ वर्ष विदेश रहकर अध्यात्मका ज्ञान बांटते थे । मुझे भी महाकुंभके मध्य कुछ दिवस उनका सानिध्य मिला। मैंने पाया कि जब भी वे अपने भक्तोंसे बात करते थे तो आपके भारत, आपके देशमें इस प्रकार कहते थे और विदेशोमें सब कुछ कितना अच्छा है यह […]
क्या आपने कभी सोचा है कि आजके वैज्ञानिक युगमें भी इतनी प्रलयंकारी प्राकृतिक आपदाएं क्यों आती रहती हैं और विनाश लीला खेल कर कर उनकी सारी वैज्ञानिक उपलब्धियोंकी ‘पुंगी’ बजाकर (उपहास कर) क्यों चली जाती हैं ? धर्माधिष्ठित राष्ट्र ही सुखी, समृद्ध और प्राकृतिक प्रकोपसे वंचित रह सकता है । किसी भी निधर्मी और अहिन्दू […]
आजके तथाकथित धर्मनिरपेक्ष हिन्दू दिखावटी प्रेमभावके महारोगसे ग्रसित हैं, अपने कुटुंबके सदस्योंसे तो प्रेम कर नहीं पाते, सर्व धर्म समभावका नारा लगा, सबको भाईचारा सिखाते फिरते हैं, लाखों कश्मीरी पंडितोंको और आसामी हिन्दुओंको अपनी ही भूमि छोड भागना पडा, इस बातका उन्हें दुख नहीं होता परंतु यदि कोई हिन्दुद्वेष्टा हुसैनकी भारत माताकी बनी नग्न तस्वीरका […]
आजके पापी, राष्ट्रद्रोही भ्रष्ट एवं येन-केन-प्रकारेण सत्ता प्राप्त करनेवालोंका परिणाम क्या होता है, इस विषयमें महात्मा विदुरजीका यह सुवचन पठनीय है। एकः पापानि कुरुते फलं भुङ्क्ते महाजनः। भोक्तारो विप्र मुच्यन्ते कर्ता दोषेन लिप्यते ।। – विदुर नीति अर्थ : यदि नायक (नेता) अकेला ही कोई पाप करता है तो उसका सारा फल राष्ट्र भोगता है […]
अनेक व्यक्ति पूछते हैं कि हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना इतने सारे दुर्जनों, विघटनकारी एवं अधार्मिक तत्त्वोंके होते हुए कैसे हो सकती है ? हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना संतोंके संकल्पसे होगी ! ध्यान रहे जो सामान्य व्यक्तिकी कल्पनासे परे है उसे जो सिद्ध कर दिखाए उसे ही ब्राह्मतेज युक्त जीव कहते हैं ! और आज भारतको वही ब्राह्मतेज […]