हिन्दू राष्ट्र

जनतामें लोकतन्त्रके प्रति उत्साह न्यून होना!


इस बार चुनावमें मतदान पहलेकी तुलनामें कम हुई है, इतना प्रचार-प्रसार करनेके पश्चात भी यदि यह स्थिति है तो इससे यह समझ सकते हैं कि देशकी जनतामें लोकतन्त्रके प्रति उत्साह न्यून हुआ है, उन्हें ज्ञात है कि चाहे कोई भी आए, स्थिति वैसी ही रहनेवाली है ! प्रजाके इस उत्साहहीनताको दूर करने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी […]

आगे पढें

जीतते हुए प्रत्याशी – क्या वे सचमें शासन करनेके खरे अधिकारी?


सामान्यत: भारतके लोकसभा या विधान सभा चुनावोंमें ५५ से ६५ % मतदान होता है ! प्रत्याशियोंकी संख्या कितनी होती है ?, यह तो सभीको ज्ञात ही है ! जो प्रत्याशी जीतता है, उसे भी उस क्षेत्रकी जनसंख्याका ३० % मत नहीं मिलता….

आगे पढें

कहते हैं कि कुत्तेकी पूंछ कभी भी सीधी धी नहीं हो सकती है, वैसा ही हाल पाकिस्तानका है !


बालाकोटमें भारतीय वायुसेनाके  हवाई आक्रमणके पश्चात (एयरस्ट्राइक) भी पाकिस्तानकी वृत्तिमें कोई सुधार नहीं है ! पिछले डेढ महीनेमें पाकिस्तानने सीमापारसे ५१३ गोलीबारी की है । इतना ही नहीं, पाकिस्तानने १०० से अधिक बार भारी शस्त्रोंका भी उपयोग किया, यद्यपि हमारे वीर सैनिकोंने इसका प्रत्युत्तर भी उसीप्रकार दिया है ! इससे यह तो हमारे राज्यकर्ताओंको समझमें […]

आगे पढें

लोकतंत्रका सबसे घिनौना स्वरुप!


लोकतंत्रका सबसे घिनौना स्वरूप चुनावसे पूर्व देखनेको मिलता है !

आगे पढें

वर्ण व्यवस्था गुण-कर्म आधारित होना!


क्षत्रिय कुलमें जन्म लेनेवाली मीरा बाईने साधनाकर श्रीकृष्णमें लीन  होकर ब्राह्मण वर्णको प्राप्त किया | यही हिन्दू धर्मकी वर्ण व्यवस्थाकी विशेषता है ! गुण और कर्म अनुसार यहां वर्णमें परिवर्तन आ जाता है ! ऐसी ही गुण-कर्म आधारित वर्ण व्यवस्थाकी हिन्दू राष्ट्रमें पुनर्स्थापना होगी !

आगे पढें

गौ माताके मांसका मुसलमानोंद्वारा भक्षण करना, क्या इस देशके और यहांके लोगोंकी भावनाओंका घोर अनादर नहीं?


जिस हिन्दू बहुल राष्ट्रने मुसलमानों और उनके पूर्वजोंको संरक्षण दिया और भारत जैसे महान देशका नागरिक कहलानेका अधिकार दिया, उस देशमें सबसे पवित्र और पूजनीय मानी जानेवाली गौ माताके मांसका मुसलमानोंद्वारा भक्षण करना, क्या इस देशके और यहांके लोगोंकी भावनाओंका घोर अनादर करना नहीं है ? क्या मानवीय आधारपर भी ऐसे कुकर्म क्षम्य हैं ? […]

आगे पढें

जब सभी क्षेत्रमें सेवानिवृत्तिकी आयु निर्धारित है तो राजनीतिकी क्यों नहीं ?


जब सभी क्षेत्रमें सेवानिवृत्तिकी आयु निर्धारित है तो राजनीतिकी क्यों नहीं ? नकली दांत और घुटनेकी शल्यक्रिया करवाकर राजनीति करनेकी क्या आवश्यकता है ? क्या हमारे पास युवा पीढीकी अकाल है ? क्या अपनी आयुष्यमें ही अपनी अगली पीढीको स्वस्थ राजधर्म सिखाकर सेवा निवृत्त नहीं होना चाहिए ? क्या क्रिकेटके खिलाडी समान राजनेताओंने भी राजनीतिसे […]

आगे पढें

आजके निधर्मी व राष्ट्रप्रेमहीन नेतागण !


आए दिन बहिर्मुख नेतागण उत्तरदायित्वहीन वक्तव्य देते हुए कहते हैं, ‘सेनाके जवान हैं, जान तो जाएगी ही !’ देशकी रक्षाके क्रममें प्राणोंकी आहुति देनेवाले सैनिकोंके विषयमें ऐसे उत्तरदायित्वहीन एवं निर्दयी वक्तव्य करनेवाले नेता क्या कभी प्रजाका भला कर सकते हैं ? हमारे सैनिक प्रतिदिन किसी न किसी आक्रमणमें सीमापर या कश्मीरमें हुतात्मा हो रहे हैं […]

आगे पढें

आजका धर्महीन हिन्दू !


धर्मान्ध चाहे अशिक्षित हों या शिक्षित हों; किन्तु उनकी धर्मान्धता नहीं जाती है; क्योंकि उन्हें अपने तथाकथित धर्मकी घुट्टी बाल्यकालसे ही पिलाई जाती है, वहीं हिन्दुओंको धर्म शिक्षण न मिलनेके कारण आजका उच्च शिक्षित हिन्दू तो स्वयंको हिन्दू कहनेमें भी लज्जा अनुभव करता है, वह स्वयंको गर्वसे धर्मनिरपेक्ष कहता है ! यह है हिन्दुओं और […]

आगे पढें

दण्डका विधान पापकर्मोंके फलको न्यून करता है !


दण्डका विधान हमारे पापकर्मोंसे निर्माण हुए कर्मफलको करता है न्यून, इस सरलसे तथ्यका भी ज्ञान नहीं है आजके भ्रष्टाचारी नेताओंको | दण्डका विधान, पापकी तीव्रताको नष्ट करने हेतु या न्यून करने हेतु दिया जाता है । जो भी शासक या प्रशासक, सार्वजनिक कार्य या राष्ट्रके कार्य करते समय हुई अपनी चूकोंको (अपराधोंको) स्वीकार नहीं करता […]

आगे पढें

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution