श्रीगुरु उवाच

आधुनिक विज्ञान एवं अध्यात्मशास्त्रमें भेद


* कहां बालवाडीकी (शिशुवर्गकी) भांति मायाके विषयोंकी जानकारी देनेवाला विज्ञान, तो कहां ईश्वरप्राप्ति करानेवाला सर्वोच्च स्तरका अध्यात्मशास्त्र ! * अध्यात्मशास्त्रमें १४ विद्याएं तथा ६४ कलाएं अर्थात विश्वके सभी विषय होते हैं । * विश्व : आधुनिक विज्ञान केवल दृश्य स्वरूपके ग्रह-तारोंके विषयमें थोडी-बहुत जानकारी दे सकता है । इसके विपरीत अध्यात्मशास्त्र सप्तलोक तथा सप्तपातालके सूक्ष्म […]

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श्रीगुरु उवाच


एक सहस्रसे अधिक वर्ष परतन्त्रतामें रहा विश्वका एकमेव देश अर्थात भारत, इस देशका विश्वमें ऐसा अभिज्ञान (पहचान) हो गया है । आइए, ईश्वरीय राज्यकी स्थापनाकर इसे परिवर्तित कर दें । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था

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श्रीगुरु उवाच


हिन्दुओंके अधोगतिके रसातलतक जानेका एकमेव कारण, ‘धर्मपालनका अभाव’ ! महाभारतका निम्न वचन यह सिद्ध करता है, धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः ।   – महाभारत, वनपर्व, अध्याय ३१४, श्लोपक १२८ अर्थ : धर्मका पालन नहीं करनेवालेका विनाश होता है तथा जो धर्मका पूर्णरूपेण पालन करता है, उसका रक्षण धर्म (अर्थात् ईश्वर) करता है ।

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श्रीगुरु उवाच


‘हिन्दू’ शब्दका अर्थ भी जिन्हें ज्ञात नहीं, ऐसे राजकीय दल और बडे हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन भारतमें कभी हिन्दू राष्ट्र ला पाएंगे क्या ? इसके विपरीत, ‘हिन्दू’ शब्दका महत्त्व जिसे ज्ञात है, ऐसे सन्त अपने संकल्पसे केवल भारतमें ही नहीं अपितु पृथ्वीपर सर्वत्र हिन्दू (अर्थात सात्त्विक) राष्ट्र लाएंगे ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन […]

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श्रीगुरु उवाच


भारतके हिन्दुओंमें हिन्दू धर्म छोडकर, विविध राज्योंमें भाषा, त्योहार, उत्सव, कपडे इत्यादिमें भिन्नता है । इस कारण हिन्दुओंको केवल धर्म ही एकजुट कर सकता है । हिन्दुओंके लिए अब धर्मका महत्त्व समझना और सभीको एकजुट करनेका प्रयास करना अत्यावश्यक है ।

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श्रीगुरु उवाच


विद्यालयके विद्यार्थी प्रधानाध्यापकका चुनाव करें, आजके चुनाव भी इसीप्रकार हास्यास्पद हैं !

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श्रीगुरु उवाच


आग न लगे इस हेतु सावधान न रहना, सर्वत्र आग लगनेपर पानी डालना जिसप्रकार मूर्खतापूर्ण है, उसीप्रकार साधना न सिखाकर, विविध माध्यमोंसे भ्रष्टाचार, ‘गुण्डागर्दी’, अनैतिकता इत्यादि फैलने देना तथा तत्पश्चात कुछ किया ऐसा दर्शाना, यह है, आजके विविध राज्यकर्ता पक्षोंकी कार्यपद्धति ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था

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श्रीगुरु उवाच


भ्रष्टाचारविरोधी आन्दोलनके लिए विशाल संगठन आवश्यक !    भ्रष्टाचारके विरोधमें लडनेवालो, तुम्हारे आन्दोलनके विरोधमें सब राजकीय पक्ष एक होंगे; क्योंकि सभी भ्रष्ट हैं । उनसे निपटनेके लिए राष्ट्रप्रेमी तथा धर्मप्रेमियोंका विशाल संगठन आवश्यक है । यह ईश्वरभक्तिसे ही साध्य हो सकेगा, यह ध्यान रखें ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था

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व्यक्तिस्वातन्त्र्यवादी, प्राणियोंके समान व्यवहार करते हैं !


स्वेच्छासे जीनेवाले व्यक्तिस्वातन्त्र्यवादी प्राणियोंसा व्यवहार करते हैं । परेच्छासे जीनेवाले, अपने स्वामीकी इच्छानुसार व्यवहार करनेवाले, प्राणियोंके समान लगेंं, तब भी वे खरे अर्थोंमें मानव होते हैं तथा ईश्वरीय इच्छासे व्यवहार करनेवाले सन्त होते हैं !

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श्रीगुरु उवाच


९०० वर्षों पूर्व भारतमें एक भी धर्मान्ध न होते हुए उन्होंने देखते ही देखते भारतपर शासन प्राप्त कर लिया । अब तो सामान्यतः सभी गांवोंमें धर्मान्ध हैं और अनेक स्थानोंपर वे बहुसंख्यक हैं । ऐसी स्थितिमें यदि उन्होंने पुनः भारतपर राज्य किया, तो आश्चर्य नहीं होगा । हिन्दुओ, यह टालना हो, तो राष्ट्र और धर्मके […]

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