श्रीगुरु उवाच

श्रीगुरू उवाच


कहां स्वेच्छासे आचरण करनेके लिए उत्तेजितकर मानवको अधोगतिकी ले जानेवाले बुद्धिप्रामाण्यवादी, तो कहां मानवको स्वेच्छाका त्याग करनेकी सीख देकर ईश्वरप्राप्ति करवानेवाले सन्त !

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श्रीगुरू उवाच


हिन्दुत्ववादियो ! मैं अकेला क्या करूंगा ? ऐसा विचार न करें ! कुछ हिन्दुत्ववादी सोचते हैं कि हम अकेले कैसे लडें ? ऐसे व्यक्ति यह जान लें कि क्रान्तिकारियोंने ऐसा कभी विचार नहीं किया । वे एकाकी ही लडे । उन्होंने अन्यायका तत्काल प्रतिकार किया; इसीलिए वे अजर-अमर हो गए तथा अंग्रेज शासनको उनसे भय […]

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‘अनेकसे एक’की ओर ले जानेवाला हिन्दू धर्म


विवाहके सन्दर्भमें ‘अनेकसे एक’की ओर ले जानेवाला हिन्दू धर्म एवं ‘अनेक’में ले जानेवाले अन्य धर्म ! १. हिन्दू धर्म : एक पत्नी २. इस्लाम : ४ पत्नियां ३. आधुनिक पाश्चात्य ईसाई अ. अनेक विवाह-विच्छेद तथा अनेक विवाह आ. बिना विवाह साथ रहना इ. एक रात्रि साथ रहना – परात्पर गुरु डॉ. जयन्त आठवले संस्थापक, सनातन […]

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श्रीगुरु उवाच


हिन्दुओ, तुम राष्ट्र एवं धर्मका वास्तविक हित करनेकी इच्छा रखते हो तो किसी भी राजनीतिक पक्षमें मत जाओ ! साधना करो एवं हिन्दुत्ववादी संगठनके कार्यकर्ता बनो !

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श्रीगुरू उवाच


कहां बंगालके साम्यवादी तथा मुसलमानोंका तुष्टिकरण करनेवाले आजके हिन्दू तो कहां बंगालके ही हिन्दू धर्मको जगमें सर्वोच्च स्थान दिलानेवाले रामकृष्ण परमहंसके शिष्य स्वामी विवेकानन्द ! – – परात्पर गुरु डॉ. जयन्त आठवले संस्थापक, सनातन संस्था

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श्रीगुरु उवाच


अन्य धर्मियोंकी अपेक्षा जन्महिन्दुओंका महत्त्व मात्र इतना ही है कि वे अन्योंकी अपेक्षा शीघ्र हिन्दू धर्म सीख सकेंगे ।

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श्रीगुरु उवाच


कहां मन्दिरोंको धन अर्पण करनेवाले पूर्वकालके राजा, महाराजा तो कहां मन्दिरोंका ही धन हडपनेवाले आजके सर्वपक्षीय राज्यकर्ता !

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विज्ञानका वास्तविक लाभ न लेनेके कारण मानवका तीव्र गतिसे पराकोटिकी अधोगतिकी ओर अग्रसर होना !


विज्ञानने विविध कार्योंमें व्यतीत होनेवाला मानवका समय बचाया है । उस समयका कैसे उपयोग किया जाए, यह विज्ञानने नहीं सिखाया, परिणामस्वरूप मानव सुखलोलुप हो गया । उस समयका उपयोग मानवने साधनाके लिए किया होता तो उसे वास्तविक लाभ हुआ होता । वैसा न करनेसे मानव तीव्र गतिसे पराकोटिकी अधोगतिकी ओर अग्रसर हुआ है । – […]

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श्रीगुरू उवाच


आजके बहुसंख्यक हिन्दुओंसा मूढ जगमें कोई न होगा ! किसी औषधिका रोगपर प्रभाव न पडनेपर, वैद्य औषधि परिवर्तित कर भिन्न औषधि देते हैं । किसी वैद्यके उपचारसे लाभ न होनेपर रोगी दूसरे वैद्यके पास जाते हैं । मात्र राजकीय पक्षोंके कारण पिछले ६८ वर्षोंमें भारत तथा हिन्दू रसातलको गए हैं, तथापि हिन्दू लोकतन्त्रके स्थानपर हिन्दू […]

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श्रीगुरु उवाच


‘देशका कुछ भी हो,  मुझे केवल पद मिलना चाहिए’, इस वृत्तिके राजनेता होनेपर देशका कभी भला होगा क्या ?

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