श्रीगुरु उवाच

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‘पटाखों’के निर्माणस्थलोंपर (कारखानोंपर) प्रतिबन्ध नहीं लगानेवाले सर्वपक्षीय राज्यकर्ता जनहित संदर्भमें कितने दायित्वशून्य हैं, यह ध्यान रखें ! स्वतंत्रतासे आजतक किसीभी पक्षका शासन जनहितकारी नहीं रहा; इसलिए पटाखे न चलाओ, इस संदर्भमें हिन्दू जनजागृति समिति अनेक वर्षोंसे आन्दोलन कर रही है । कोई सुबुद्ध ‘सरकार’ होती तो अबतक उसने पटाखोंके ‘कारखानों’पर प्रतिबन्ध लगा दिया होता । […]

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राष्ट्र एवं धर्मके लिए चुनावमें प्रत्याशियोंद्वारा थोडे स्थानका त्याग न कर सकनेवाले राजकीय पक्ष देश तथा धर्मके लिए सर्वस्वका त्याग कभी करेंगे क्या ? –  परात्पर गुरु  डॉ. जयंत आठवले

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कोई भी कार्य करनेके संदर्भमें राजनीतिज्ञ तथा साधक इनके विचारोंमें भेद                                                                                           […]

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जीतसे हार भली; क्योंकि जीतसे अहंभाव बढता है । हारनेसे वैसा नहीं होता । – परम पूज्य डॉ. जयंत आठवले (१४.१.२०१४)

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माता-पिताके प्रति होनी चाहिए कृतज्ञता ! किसीने थोडी बहुत सहायता की, तब भी हम उनके प्रति कृतज्ञ होते हैं । माता-पिता तो हमें जन्म देते हैं, हमें शैशव अवस्थासे बडा करते हैं; अतः उनके प्रति कितनी कृतज्ञता होनी चाहिए ?, माता-पिताके वृद्ध होनेके पश्चात अन्तिम समयतक उनका ध्यान रखना, यह कृतज्ञता व्यक्त करनेका एक मार्ग […]

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विज्ञानका अधिकाधिक उपयोग मानवको सुखी करनेके लिए किया गया जैसे – दूरदर्शन, भ्रमणभाष, यात्रा हेतु भिन्न साधन इत्यादि | फलस्वरूप मनुष्य सुखमें अधिकाधिक लिप्त होता चला गया | सुखका त्याग करनेपर ही चिरंतन आनंदकी प्राप्ति होती है, इसका विस्मरण होनेके कारण नैतिकता, विवेक, परोपकार, त्याग इत्यादि गुणोंका अवमूल्यन होनेके कारण वह दुखोंके रसातलमें डूब गया […]

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धनाढ्य पिताकी संतानकी स्थिति तब दयनीय हो जाती है जब वह अपने पिताद्वारा अर्जित धनको नष्ट कर देता है, आज हिंदुओंकी स्थिति भी उनके पूर्वजोंद्वारा दिये गए ज्ञान, धर्म, संस्कृति, तत्त्वज्ञान, कला, आयुर्वेद, तीर्थक्षेत्र, शस्त्रविद्या इत्यादिके धरोहरको नष्ट कर सर्व क्षेत्रोंमें दयनीय हो गयी है । -परात्पर गुरु डॉ . जयंत आठवले (२६.५.२०१३)

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सीखनेसे नहीं अपितु सेवा परिपूर्ण एवं भावपूर्ण करनेके कारण आनंद प्राप्त होता है ! सीखनेमें आनंद नहीं होता है | वह बौद्धिक सुख होता है | सेवा परिपूर्ण एवं भावपूर्ण करनेके कारण आनंद मिलता है | अतः मुझे नवीन कुछ सीखने हेतु नहीं मिला यह दुख करनेकी अपेक्षा, मुझे मिली सेवा मैं परिपूर्ण एवं भावपूर्ण […]

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आजके राजनेताओंके कारण हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अपरिहार्य है ! राष्ट्र एवं धर्म नष्ट होनेकी स्थिति है, तब भी राजनेता, लोकप्रतिनिधि तथा राज्यकर्ता, पर्यटन, पब (आधुनिक मद्यशाला एवं नृत्यशाला) बिकिनी इत्यादी विषयोंपर वार्तालाप तथा विवाद करते हैं । मृतवत् जनता केवल सुनती है । इसमें परिवर्तन लाकर देशका पूर्ववत् वैभव प्राप्त करने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना […]

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 कहां अर्थ और कामपर आधारित आजका विवाह, तो कहां साधनाको केन्द्र बिंदु मानकर किये जानेवाले धर्मानुसार विवाह ! धर्मानुसार विवाह धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष यह चार पुरुषार्थ साध्य करनेके लिये होता है । आजके विवाहमें मात्र अर्थ और कामको ही स्थान है, इसलिये आर्थिक स्थिति  देखकर एवं कामपूर्ति हेतु विवाह होते हैं, इनमें मानसिक आधारका […]

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