अक्तूबर ३१, २०१८
‘सीबीआई’के विशेष निदेशक राकेश अस्थानाके विरुध्द पूर्वमें घूसकांडकी जांच कर रहे सीबीआई अधिकारी अजय कुमार बस्सीने भी अब उच्चतम न्यायालय पहुंचे । बता दें कि सरकारद्वारा राकेश अस्थाना और सीबीआई निदेशक आलोक कुमारको छुट्टीपर भेजे जानेके साथ ही अजय कुमार बस्सीका स्थानान्तरण भी पोर्ट ब्लेयर कर दिया गया था । अब बस्सीने न्यायालयमें अपने इस स्थानान्तरणको रुकवाने या संशोधित करानेकी मांगके साथ ही आरोपियोंकी चलभाष क्रमांक सूचिका (कॉल डिटेल्स) वर्णन न्यायालयमें किया है, जिसमें आरोपी बात करते हुए आपसमें कथित रूपसे कह रहे हैं कि ‘अस्थाना तो अपना आदमी है !’ बस्सीने अपनी याचिकामें राकेश अस्थानापर कई गंभीर आरोप लगाए हैं !
अधिवक्ता सुनील फर्नांडेसने मंगलवार, ३० अक्तूबरको ‘सीबीआई’के डिप्टी एसपी अजय कुमार बस्सीकी याचिका न्यायिक पीठके समक्ष रखी । इसमें मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायाधीश यूयू ललित और केएम जोसेफ सम्मिलित थे । अपनी याचिकामें अजय कुमार बस्सीने राकेश अस्थानाके विरुद्घ सोमेश प्रसाद और मनोज प्रसादके साथ मिलकर षडयन्त्र रचने और भ्रष्टाचारके कई गंभीर आरोप लगाए हैं । बस्सीने आरोप लगाया कि प्रसाद भाइयोंद्वारा राकेश अस्थानाके नामपर दो भिन्न-भिन्न समयमें, दिसम्बर, २०१७ और अक्टूबर, २०१८ में घूस मांगी और ली गई । इसमें प्रथम बार २.९५ कोटि रुपए लिए गए, वहीं दूसरी बार तीन भागोंमें कुल ३६ लाख रुपए लिए गए !
बस्सीने न्यायालयमें बताते करते हुए एक अन्य शीर्ष नौकरशाहके नामका भी इस प्रकरणमें उल्लेख किया । ये अधिकारी रॉके स्पेशल सचिव सामंत गोयल हैं ! बस्सीने बताया कि जब वह राकेश अस्थानाके विरुद्घ लगे आरोपोंकी जांच कर रहे थे, तब टेक्निकल सर्विलांसकी जांचमें ज्ञात हुआ कि जब १६ अक्टूबरकी रात्रिमें मनोज प्रसादको बन्दी बनाया गया तो सोमेश प्रसादने तुरंत सामंत गोयलको चलभाष किया था, जिसके पश्चात् सामंत गोयलने राकेश अस्थानाको चलभाष किया था ।
चलभाष वार्ता :
सोमेश अपने ससुर सुनील मित्तलसे बात करते हुए, “अस्थाना तो अपना आदमी है । मनोज, अस्थानासे ३-४ बार मिला है । अभियोग र्रयं होनेके पश्चात् सामंत भाई भी अस्थानासे मिले थे । सामंत भाई, अस्थानाके काफी निकटवर्ती हैं।”
सामंत गोयल सोमेशसे बात करते हुए, “तुम किसी भी मूल्यपर भारत नहीं आना !”
अजय कुमार बस्सीने बताया कि उनकेद्वारा जांचके समय एकत्रित सभी साक्ष्य सीबीआईके पास हैं और उन्हें सन्देह है कि साक्ष्योंके साथ छेडछाड या फिर उन्हें नष्ट भी किया जा सकता है ।
“इस प्रकरणसे स्पष्ट है कि कैसे भ्रष्टाचार हमारी व्यवस्थाकी जडों तक फैल गया है और क्या ऐसी व्यवस्थामें एक साधारण नागरिक अपने लिए कुछ आशा कर सकता है ?; इसलिए अब धर्मनिष्ठ राष्ट्रकी आवश्यकता है, जहां सर्व ओर धर्म व न्याय होगा !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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