जुलाई १६, २०१८
उच्चतम न्यायालयने ‘शिया वक्फ बोर्ड’के अधिकारीकी उस याचिकापर आज केन्द्रसे उत्तर मांगा, जिसमें देशभरके भवन और धार्मिक स्थानोंपर चांद-तारे वाले हरे रंगके ध्वज फहरानेपर प्रतिबन्ध लगानेकी मांगकी गई है । न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषणकी पीठने ‘शिया वक्फ बोर्ड’के अधिकारी सैयद वसीम रिजवीकी ओरसे प्रस्तुत अधिवक्तासे याचिका की एवं एक प्रति अतिरिक्त प्रतिवक्ता अधिकारी (सॉलिसिटर जनरल) तुषार मेहताको देनेके लिए कहा, ताकि वह केन्द्रकी ओरसे उत्तर दे सकें ।
रिजवीने अपनी याचिकामें कहा कि चांद और तारे वाले हरे रंगके ध्वज इस्लाममें मान्य नहीं है और यह पाकिस्तानके एक राजनीतिक दलके ध्वज जैसा दिखता है । उन्होंने अपनी याचिकामें यह भी कहा कि मुम्बई और देशमें अन्य स्थानोंके भ्रमणके मध्य उन्होंने पाया कि कई भवन तथा धार्मिक स्थानोंपर ये ध्वज हैं, जिनसे हिन्दुओं और मुसलमानों के मध्य कथित रुपसे तनाव उपज है ।
याचिकामें आक्षेप किया गया है कि ये ध्वज, शत्रु देशके दल ‘पाकिस्तान मुस्लिम लीग’के ध्वजकी भांति दिखते हैं । इसमें कहा गया है कि हरे रंगके अर्द्धचन्द्र सितारे वाले ध्वजकी उत्पत्ति राजनीतिक दल ‘मुस्लिम लीग’से हुई, जिसकी स्थापना १९०६ में नवाज वकार उल-मलिक और मोहम्मद अली जिन्नाने की थी । वर्तमान समयमें भारतीय मुस्लिम इसका प्रयोग कर रहे हैं, जो इसे इस्लामी ध्वज मानते हैं ।
याचिकामें कहा गया है कि हरे रंगकी पृष्ठभूमिमें चांद और तारा, कभी किसी इस्लामी प्रक्रियाका भाग नहीं रहा और इसकी इस्लाममें कोई भूमिका या कोई महत्व नहीं है । याचिकामें कहा गया है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रोंमें ऐसे ध्वज खुलेमें फहराए जाते हैं !
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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