योगी आदित्यनाथके शासनमें लौटनेके साथ ही अपराधियोंमें हुआ भयका संचार, स्वतः कर रहे हैं आत्मसमर्पण 


१७ मार्च, २०२२
             ‌‌    उत्तर प्रदेशमें विधानसभा चुनावोंके मध्य लोग योगी आदित्यनाथके नेतृत्व वाले शासनके कार्यकालमें न्याय व्यवस्थाके ‘मोर्चे’पर हुए सुधारोंकी प्रशंसा करते दृष्टिगत हुए थे । अब सत्तामें पुनः आनेके पश्चात अपराधियोंके मध्य वही भय निर्मित हो रहा है एवं अपराधी अब स्वयं ही ‘थाने’ पहुंचकर आत्मसमर्पण कर रहे हैं । प्रकरण गोंडाके ‘थाना’ छपियाका है, जहां  २५ सहस्र (हजार) रुपएके पुरस्कारवाला अपराधी स्वयं आत्मसमर्पण करने ‘थाने’ पहुंचा । उसके हाथमें एक ‘तख्ती’ भी थी जिसपर लिखा था ‘मैं आत्मसमर्पण कर रहा हूं, मुझे गोली मत मारो ।’ अपराधीका अभिज्ञान (पहचान) गौतम सिंहके रूपमें हुई है । वह अपने भाईके साथ आत्मसमर्पण करने पहुंचा था तथा भयभीत लग रहा था । उसका कहना था कि वह बहुत भयमें गया था कि कप्तान साहब उसे गोली मार देंगे । उसने करनपुर गांवसे शिव प्रसाद नामके गल्ला व्यवसायीका ६ मार्चको अपने अपराधी मित्रोंके साथ अपहरण किया था । परिवाद होनेपर ‘पुलिस’ने प्रकरण प्रविष्ट किया था  । वहीं चार अपराधियोंमें से सबसे पहले ८ मार्चको ही आरोपी रवि प्रकाश उपनाम रिंकूको बन्दी बना लिया गया, इसके पश्चात छपिया ‘पुलिस’ व ‘एसओजी पुलिस’की संयुक्त कार्यवाहीमें १३ मार्चको जुबेर व राजकुमार यादवको बन्दी बनाया गया । मुठभेडके मध्य एक आरोपीके पांवमें गोली भी लगी थी । उल्लेखनीय है उत्तरप्रदेश ‘पुलिस’ अपराधियोंके प्रति कठोर व्यवहार दर्शा उन्हें उनके स्थान अर्थात बन्दीगृह पहुंचा रही है । वहीं मेरठ ‘पुलिस’ने ढाई लाख रुपए पुरस्कारवाले बदन सिंह ‘बद्दो’ एवं उसके सहयोगीके अवैध ‘दुकानों’ व ‘फेक्ट्री’वाली भूमिको मुक्त कराया है तो कानपुरमें समाजवादी ‘पार्टी’के नेताकी अवैध भूमिपर ‘बुलडोजर’ चलाया गया ।
      उत्तर प्रदेशमें प्रशासनद्वारा न्याय व्यवस्था स्थापित करनेके प्रयास आनेवाले हिन्दूराष्ट्रका आभास है, जिसमें न्याय व्यवस्था पूर्णतः सक्षम होगी एवं रामराज्य स्थापित होगा । इस धर्मस्थापना हेतु हम सभीको तीव्र उत्कण्ठासे साधनाकर ईश्वरसे आशीष प्राप्त करनेके प्रयास करने हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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