देव स्तुति


गजाननाय महसे प्रत्यूहतिमिरच्छिदे । 
अपारकरुणापूरतरङ्गितदृशे नमः ॥
अर्थ : विघ्नरूप अन्धकारका नाश करनेवाले, अथाह करुणारूप जलराशिसे तरंगित नेत्रोंवाले गणेश नामक ज्योतिपुंजको नमस्कार है ।


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