जीवनमें सदैव धर्म और अध्यात्मको प्राथमिकता दें !


जो लोग अपने जीवनमें धर्म और अध्यात्मको प्राथमिकता नहीं देते हैं, जब उनके जीवनमें विषम परिस्थितियां आती हैं तो ईश्वर भी उनकी सहायता नहीं करते हैं ! सामान्य लोगोंके जीवनमें कष्ट उनके इस जन्म या किसी और जन्मके अधर्मका परिणाम होता है, उसका फल सृष्टिके कर्मफल सिद्धांत अनुसार भोगना ही पडता है, उस नियमको बनानेवाले भगवान उसमें हस्तक्षेप नहीं करते ! वहीं भक्तको अपने प्रारब्ध अनुसार भी कष्ट हो और वह ईश्वरको आर्ततासे पुकारे तो ईश्वर उसकी सहायता हेतु त्वरित उपस्थित होते हैं और उसके कष्टको या तो सहन करनेकी शक्ति देते हैं या उसकी तीव्रताको न्यून कर देते हैं ! इसलिए भक्त बनें अपने जीवनमें धर्म, अध्यात्म और साधना हेतु समय निकाला करें !



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