धर्मधारा


इतनी सारी निर्दोष बालिकाएं नरपिशाचोंके हाथों बलि चढ रही हैं; तब भी इस देशके राज्यकर्ता अश्लील जालस्थल, चित्रपट और धारावाहिकपर प्रतिबन्ध नहीं लगाते हैं, इससे ही इस देशके शासनकर्ताओंकी स्त्रियोंके प्रति संवेदनशून्यता ज्ञात होती है । बलात्कार करनेवाले नरपिशाचोंका लिंग उच्छेद कर, उन्हें तडप-तडप कर मरने करनेके लिए सार्वजनिक स्थानपर छोड देना चाहिए और मरनेके पश्चात उनके शवको कोई अपराधी, घसीटकर चील और गिद्धको भक्षण हेतु दे दे ! मात्र फांसी, उनके लिए बहुत ही अल्प दण्ड है । अमानवीय नृशंस कृत्यपर ऐसा दण्ड देना चाहिए कि पुनः कोई और ऐसा कृत्य करनेकी स्वप्नमें भी कल्पना न करें, नरपिशाचोंके साथ ऐसा नहीं हो रहा है; इसलिए अब बच्चियों एवं युवतियोंके सामूहिक बलात्कार प्रतिदिनके समाचार आने लगे हैं । न्यायका सिद्धान्त है, नेत्रके स्थानपर नेत्र, प्राणके स्थानपर प्राण !



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