पालतू पशुओंको रखने सम्बन्धी योग्य दृष्टिकोण


आजकल अनेक लोग अपने छोटेसे घरमें कुत्ते या बिल्ली पालते हैं । पशुको पालने हेतु उसके लिए एक भिन्न कक्ष हो तो ही उसे पालना चाहिए । ऐसे पालतू पशु घरमें सर्वत्र अपने केश बिखेरते हैं और शौच या मूत्रत्याग करते हैं, इससे वास्तु अशुद्ध होता है । इन पालतू पशुओंको अपने घरके भीतर प्रवेश नहीं देना चाहिए । पूर्वकालमें भी सभी घरोंमें कुत्ते होते थे; किन्तु उन्हें घरमें प्रवेश नहीं करने दिया जाता था । प्राचीन और मध्य कालमें लोग कुत्ता अपने साथ इसलिए रखते थे कि वे जंगली जानवरों और लुटेरोंसे बच सकें ! बंजारा जाति और आदिवासी लोग कुत्तेको पालते थे, जिससे वे हर प्रकारके संकटसे पहले ही सतर्क हो जाएं ! आजकल लोग घरोंमें कुत्ता अपने मनोरंजनके लिए या सामाजिक प्रतिष्ठा बढाने हेतु पालते हैं; क्योंकि जिस प्रकारके विदेशी कुत्ते वे पालते हैं, वे तो अपना भी रक्षण नहीं कर सकते हैं, चोरोंसे उनके घरोंकी रक्षा वे क्या करेंगे ? आजके आधुनिक लोग अपने माता-पिता या अतिथियोंसे प्रेम नहीं कर पाते हैं अर्थात उनके लिए उनके घरमें स्थान नहीं होता है; किन्तु पालतू पशुओंको अपने रसोईघर, शयनकक्ष एवं बैठक कक्षमें बडे प्रेमसे रखते हैं ! इससे ही हमारे विचारकी दिशा कितनी विपरीत चल रही है, यह ज्ञात होता है, ऐसे अपवित्र एवं संस्कारहीन घरोंमें देवताका वास कैसे हो सकता है ?, किंचित सोचें ! पशुओंसे प्रेम करना पाप नहीं; किन्तु सबकुछकी अपनी मर्यादा होती है, जब हम उसे लांघकर कुछ कृति करते हैं तो उसका परिणाम अनिष्टकारी होता है ।



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