एक पाठकने पूछा है, “व्यवस्था परिवर्तनके लिए क्रान्ति क्यों ? क्या दुर्जनोंको प्रेमसे समझाकर परिस्थितिको परिवर्तित नहीं किया जा सकता है ?”
उत्तर बडा सरल है, क्या प्रभु श्री रामने और भगवान श्री कृष्णने रावण और दुर्योधनको प्रेमसे सुधारनेकी शिक्षा नहीं दी थी ?; परन्तु परिणाम क्या हुआ ? जब अवतारी राम और परमेश्वर सदृश कृष्ण, दुर्जनोंको समझाकर उन्हें सन्मार्गपर नहीं ला पाए तो हम और आप यह कैसे कर सकते हैं ? ऐसेमें दुर्जनोंको दण्डित करना, यह एक मात्र पर्याय है । – तनुजा ठाकुर
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