मार्च २२, २०१९
शासनके पृथकतावादी नेताओंको दी गई सुरक्षा भी वापस ले ली है । हुर्रियत नेता घाटीमें रहनेवाले पाकिस्तान समर्थक हैं, जो कश्मीर घाटीमें पृथकतावादी भावनाओंको भडकानेके साथ-साथ सुरक्षाबलोंपर पत्थर फेंकनेके लिए युवाओंको पैसे देते हैं और भडकाते है ।
जम्मू-कश्मीरके पृथकतावादियोंपर भारतीय जांच ‘एजेंसियों’का नियन्त्रण कसता जा रहा है । प्रवर्तन निदेशालयने घाटीके पृथकतावादी नेता सैयद अली शाह गिलानीके ‘फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट’के आधीन ₹१४.४० लक्ष रुपयोंका अधिशुल्क (जुर्माना) लगाया है । इसके अतिरिक्त ‘ईडी’ने १० सहस्र ‘डॉलर’ ( ₹७लक्षके आसपास) अधिकृत (जब्त) किए हैं । यह राशि वर्ष २०० में गिलानीके श्रीनगर स्थित आवासपर आयकर विभागद्वारा छापेके मध्य पकडी गई थी ।
केंद्रीय जांच विभागने ८७ वर्षीय पृथकतावादी आतंकवादी गिलानीको ‘एफइएमए’के भिन्न-भिन्न प्रावधानोंके आधीन ध्यानपत्र (नोटिस) भेजा था । यही नहीं, ‘जेकेेएलएफ’ पूर्व अधिकारी यासीन मलिकके पाससे मिली अवैध विदेशी मुद्रा को अधिकृत (जब्त) करनेके साथ ही निदेशालयपर अधिशुल्क (जुर्माना) भी लगाएगा । मलिकके विरुद्ध भी वैैधानिक कार्यवाही जारी है । बता दें कि ‘NIA’ और अन्य ‘एजेंसियां’ घाटीमें ‘टेरर फंडिंग’की जांच कर रही हैं। सुरक्षा ‘एजेंसियों’ने इस मध्य अलगाववादी नेताओंसे पूछताछ की है।
पुलवामामें १४ फरवरीको हुए आतंकवादी आक्रमणके पश्चात अलगावादी नेताओंके विरुद्घ भारत शासनने अपने तेवर कडे कर लिए हैं ।
“जब देशमें ऐसे द्रोही हमारे ही धनपर आश्रय पा रहे हों, तो आतंकियोंकी आवश्यकता ही क्या है ? धन्य है कांग्रेस शासन, जो ऐसे नीलमणि इस देशको प्रदान किए कि आए दिन हमारे सैनिक प्राणोंकी आहुति दे रहे हैं । आतंकवादके नामपर आज हम एक बडा धनका भाग व्यय कर रहे हैं और एक ओर आतंकके आधारभूत इन संगठनोंको आश्रय दे रहे हैं, यह हास्यास्पद ही है । गत दिवसोंमें मोदी शासनकी इस दिशामें की कार्यवाही प्रशंसनीय है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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