४१ किसानोंकी मृत्युको अब नोटबन्दी समान ‘किसान आन्दोलन’से जोड रहे राष्ट्र विरोधी दल


२८ दिसम्बर, २०२०
      नवीन कृषि विधेयकके विरोधमें ‘किसान आन्दोलन’को अब एक माहसे अधिक हो चुका है । अपनी मांगोंपर अटल कुछ किसान देहली व उसके निकटके क्षेत्रोंमें धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं । इसी मध्य रविवारको देहलीके मुख्यमन्त्री अरविन्द केजरीवालने भी ‘किसान आन्दोलन’का समर्थन करते हुए कहा कि हमारे किसान साथियोंको ३२ दिनोंसे भीषण शीतमें रहना पड रहा है तथा इस आन्दोलनके कारण ४१ किसानोंकी मृत्युका उन्हें अत्यधिक दुःख भी है । अब किसान आन्दोलनको लेकर विभिन्न राष्ट्र विरोधियोंद्वारा अपने अपने मत अनुसार वक्तव्योंको साझा किया जा रहे हैं । गत दो माहमें मृत्युको प्राप्त हुए किसानोंकी मृत्युको ‘किसान आन्दोलन’से जोडा जा रहा है, वैसे ही जैसे पूर्वमें नोटबन्दीके समय मारे गए लोगोंकी मृत्युका कारण नोटबन्दी बताया जा रहा था । वहीं मारे गए इन ४१ किसानोंमेंसे अधिकांशकी मृत्युके कारण पृथक हैं । बताया जा रहा है कि पंजाब-हरियाणामें मारे गए किसानोंमेंसे अधिकांशकी मृत्यु  दुर्घटनाके कारण हुई, तो अन्यकी विष ग्रहण करने व आत्महत्याके कारण हुई । वहीं एक ८० वर्षीय महिलाकी मृत्यु ‘रेलवे ट्रैक’पर गिरनेके कारण हुई एवं अन्य एक महिलाकी मृत्यु हृदयाघातसे हुई ।
    देशमें नागरिकोंको विभाजित करने हेतु राष्ट्र विरोधी दिन-प्रतिदिन नवीन प्रयासोंद्वारा राष्ट्रमें घृणा प्रसारित कर रहे हैं । अब शासनको चाहिए कि शीघ्र ही इस आन्दोलनका समाधान निकालकर इसे समाप्त करवाए, जिससे राष्ट्र विरोधियोंकी मंशा पर पूर्णतः अंकुश लगे । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया


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