जनवरी १९, २०१९
पादरी फ्रैंको मुलक्कलपर दुष्कर्मका आरोप लगानेवाली नन सहित पांच ननोंने केरलके मुख्यमन्त्री पी.विजयनको पत्र लिखकर उनसे इस प्रकरणमें हस्तक्षेपकी मांग की है । इनमें चार नन वे हैं, जिन्होंने दुष्कर्मके आरोपी मुलक्कलको बन्दी बनानेकी मांगको लेकर हुए प्रदर्शनमें भाग लिया था । मुख्यमन्त्रीके हस्तक्षेपकेद्वारा वे यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि इस प्रकरणमें अभियोग समाप्त होनेतक उनके स्थानान्तरणका आदेश प्रभावी नहीं हो । साथ ही, मुलक्कलके विरुद्घ दुष्कर्मका आरोप लगानेवाली ननने भी मुख्यमन्त्रीको पत्र लिखकर इस प्रकरणमें उनकी सहायता मांगी है । मुख्यमन्त्रीको यह पत्र तब लिखा गया, जब गत वर्ष मुलक्कलके विरूद्ध हुए प्रदर्शनका नेतृत्व करनेवाली पांचमेंसे चार ननोंको कोट्टायम जनपदमें उनके ‘कॉन्वेन्ट’से जानेका निर्देश दिया गया । गत वर्ष उन्हें उनके समूहद्वारा (मिशनरीज ऑफ जीसस) दिए स्थानान्तरण आदेशका अनुपालन करते हुए उन्हें कॉन्वेन्ट छोडनेके निर्देश दिए गए थे । उन्होंने अपने पत्रमें आरोप लगाया, ‘‘उनका उद्देश्य मुझे लक्ष्य बनाना, उद्विग्न करना और यातना देना है । यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है तो मेरे प्राण संकटमें होंगें ।’’ मार्च और मई २०१८ के मध्य दिए स्थानान्तरण आदेशके अनुसार, उनके समूह ‘मिशनरीज ऑफ जीसस’ने ननोंको निर्देश दिया कि वे अपने पहलेवाले कॉन्वेन्टमें सम्मिलित हों । ऐल्पी, अनुपमा, जोसेफाइन और एनसिटा नामकी इन ननोंको ‘मिशनरीज ऑफ जीसस’की वरिष्ठ अधिकारी रेजिना कदमथोट्टूने नोटिस देकर उनसे कहा था कि वे ‘मिशनरीज ऑफ जीसस’के सदस्योंके रूपमें दिए गए उत्तरदायित्व सम्भालें । मुलक्कलके विरुद्घ आरोप लगानेवाली ननको न्याय दिलानेके लिए लड चुकी सिस्टर नीना रोजको कॉन्वेन्ट छोडनेके निर्देश नहीं दिए गए हैं ।
“इस समूचे प्रकरणमें तथाकथित नारीवादियोंका मौन विचित्र है । सबरीमालासे लेकर प्रत्येक प्रकरणमें नारीवादका दिखावा करनेवाले निधर्मी मुख्यमन्त्री व केरल शासन और तथाकथित समाजसेविकाएं सभी मौन है । प्रतीत होता था कि ये सब कमसेकम ननोंके प्रकरणपर बोलेंगें; परन्तु इन सभीका मौन इनका ढोंग उजागर करता है । सबरीमालाके लिए महिला पंक्ति बनानेवाले, हिन्दुओंके प्रति विष उगलनेवाले मुख्यमन्त्री इसपर क्यों मौन हैं, इसपर वे उत्तर दें ! इससे स्पष्ट है कि सबरीमालामें उठाया प्रकरण नारीवादका नहीं गिरिजाघरों व पादरियोंके अनुगामी मुख्यमन्त्रीकी हिन्दूद्रोहिताका है ! सभी हिन्दुवादी ऐसे गिरिजाघरों व पादरियोंके विरुद्घ मुखर होकर विरोध करें, जिससे उन ननोंको न्याय मिल पाए !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : भास्कर
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