घरका वैद्य – गुड (भाग-३)


मूत्र सम्बन्धित समस्यामें : गन्ना एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक है और गुड भी इसी प्रकार कार्य करता है । यह मूत्रको उत्तेजित करनेमें सहायता करता है और मूत्राशयकी सूजनको न्यून करनेमें भी सहायता करता है । इसके साथ-साथ गुड मूत्र करनेमें हो रही कठिनाईको न्यून करनेमें सहायता करता है; किन्तु यह ‘प्रोस्टेट’ ग्रन्थिकी अतिवृद्धिमें सहायता नहीं कर सकता । विशेषज्ञ मूत्र सम्बन्धित समस्याओंकी चिकित्सा करनेके लिए और मूत्र प्रवाहमें सुधार लानेके लिए गुडके साथ एक चषक (गिलास) उष्ण (गर्म) दूध पीनेके लिए परामर्श देते हैं ।

शारीरिक निर्बलताके लिए : गुड हमारे स्वास्थ्यके लिए बहुत ही लाभदायक होता है । इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि यह श्वेत शक्करके विपरीत है । यह धीरे-धीरे आपके उदरमें पच जाता है और अवशोषित हो जाता है । इससे शरीरमें रक्त-शर्कराका स्तर एकाएक अधिक नहीं बढता है । इसका सेवन शरीरको ऊर्जा प्रदान करता है । शारीरिक निर्बलतामें गुडके साथ दूधका सेवन करना बहुत ही लाभदायक होता है । गुडके साथ दूधका उपयोग दुर्बल शरीरको सबल बनाता है । यह शारीरिक अक्षमताको दूर करके, शरीरको ऊर्जा प्रदान करनेमें सहायता करता है । यदि आपको दूधके साथ गुड रुचिकर नहीं है तो एक पात्रमें, जलमें ५ ग्राम गुड, १० मिलीलीटर नीम्बूका रस, १ ग्राम श्याम लवण अर्थात काला नमक मिलाकर सेवन करें ! यह शारीरिक और सामान्य दुर्बलताको दूर करनेमें बहुत लाभदायक है ।



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution