भीतपर (दीवारोंपर) ‘ग्राफिकी’ लिखनेवाले मो नजीरको मेंगलुरु पुलिसने बनाया बन्दी


०३ दिसंबर, २०२०

कर्नाटकके मेंगलुरुमें एक घरकी भीतपर (दीवारोंपर) संघियों और मनुवादियोंको धमकी भरी भयावह बातें लिखनेके सन्दर्भमें पुलिसने गुरुवार, ३ दिसम्बरको एक मोहम्मद नजीर नामक युवकको बन्दी बनाया है । ‘सोशल मीडिया’पर आरोपीको ‘जॉमेटो’का ‘डिलीवरी बॉय’ बताया जा रहा है ।
एक सप्ताह पूर्व मेंगलुरुमें २८ नवम्बरको पुलिस चौकीकी भीतपर एक चित्र देखा गया था, जिसमें लिखा था, “गुस्ताख-ए-रसूलकी एक ही सजा, सर तनसे जुदा ।”
इसके अतिरिक्त इससे पूर्व एक घरकी भीतपर (दीवारपर) लिखा गया था, “हमें इस बातके लिए विवश नहीं किया जाए कि हमें संघियों और मनुवादियोंका सामना करनेके लिए ‘लश्कर-ए-तैय्यबा’ और ‘तालिबान’की सहायता लेनी पडे ।” आगे लश्करके समर्थनमें लिखा था, “लश्कर जिन्दाबाद ।”
पिछले दिनों मेंगलुरूकी भीतपर लिखी गई ये बातें ऐसी थीं, जैसे पाकिस्तानके लोग फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोंके विरोधमें उतरे थे । ‘तहरीक-ए-लब्बैक’के सहस्रों समर्थक फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोंके विरोधमें रावलपिंडीकी सडकोंपर उतरे थे । उनका विरोध इसपर था कि फ्रांसके राष्ट्रपतिने पैगम्बर मोहम्मदका ‘कार्टून’ बनानेके अधिकारका रक्षण किया था ।

         जिहादी समाजमें भय उत्पन्नकर स्वयंका राज चलाने चाहते हैं, कभी शस्त्रोंके माध्यमसे, तो कभी चित्र अर्थात ‘ग्राफिट’ माध्यमसे; किन्तु यदि हिन्दू एकत्रित होकर इन जिहादियोंका बहिष्कार करें, तो ये जिहादी अवश्य ही असफल हो जाएंगे ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ

स्रोत : ऑप इंडिया



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