हरियाणाके ‘भाजपा’ शासनने ‘गोरखधन्धा’ शब्दके प्रयोगपर लगाया प्रतिबन्ध
१९ अगस्त, २०२१
हरियाणाके ‘भाजपा’ शासनने ‘गोरखधन्धा’ शब्दके प्रयोगपर प्रतिबन्ध लगा दिया है, जिसका प्रयोग सामान्यतः अनैतिक कृत्योंका वर्णन करनेके लिए किया जाता रहा है । बुधवारको प्रस्तुत (जारी) एक आधिकारिक वक्तव्यके अनुसार, गोरखनाथ समुदायके एक प्रतिनिधिमण्डलसे वार्तालापके पश्चात मुख्यमन्त्री मनोहर लाल खट्टरने इस सम्बन्धमें निर्णय लिया । प्रतिनिधिमण्डलने खट्टरसे इस शब्दके प्रयोगपर प्रतिबन्ध लगानेका आग्रह किया; क्योंकि यह सन्त गोरखनाथके अनुयायियोंकी भावनाओंको ठेस पहुंचाता है ।
मुख्यमन्त्री मनोहर लाल खट्टरने वक्तव्य दिया कि गोरखनाथ सन्त थे और किसी भी आधिकारिक भाषा, भाषण या किसी भी सन्दर्भमें इस शब्दका प्रयोग उनके अनुयायियोंकी भावनाओंको ठेस पहुंचाता है; इसलिए किसी भी सन्दर्भमें इस शब्दका उपयोग पूर्ण रूपसे प्रतिबन्धित कर दिया गया है ।
ज्ञातव्य है कि कुछ दिवस पूर्व बुढानामें महायोगी शिव गोरखनाथ महासभा व नाथ सम्प्रदायके अनुयायियोंने ‘तहसील’ मुख्यालयपर ‘गोरखधन्धा’ शब्दके उपयोगके विरुद्ध विरोध प्रकट किया था । अनुयायियोंने कहा कि आए दिवस ‘प्रिन्ट’ व ‘इलेक्ट्रॉनिक मीडिया’में तथा प्रशासनिक अधिकारी प्रतिदिवस अनुचित कार्योंके लिए इस शब्दका प्रयोग करते है । उन्होंने अनुचित कार्योंके लिए ‘गोरखधन्धा’ शब्दके प्रयोगपर रोक लगाने तथा दण्डात्मक कार्रवाई करनेकी मांग की है ।
वस्तुतः महायोगी गुरु गोरखनाथजीने अत्यन्त कठिन योगासनोंकी खोज की, जो सामान्य व्यक्तिके लिए एक कौतुक समान होते थे और माना जाता है कि तभीसे कठिन कार्योंके सम्बन्धमें मूढ लोग ‘गोरखधन्धा’ शब्दका उपयोग करने लगे, जो वस्तुतः गुरु गोरखनाथजीका अपमान ही है । हरियाणाके मुख्यमन्त्रीका यह निर्णय अत्यन्त प्रशंसनीय है और इसका अनुसरण सम्पूर्ण भारतमें किया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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