केरलमें ईसाइयोंने किया ‘हलाल’ मांसका विरोध, हिन्दुओंको भी किया जाता है विक्रय करनेको विवश


१६ दिसम्बर, २०२०
      ईसाई समुदायने पूछा है कि ईसामसीहके जन्मदिवसपर ‘हलाल’ मांस क्यों खाना चाहिए ? हिन्दू समूहोंका कहना है कि ईसाई और हिन्दू, दोनोंको ‘हलाल’ मांस विक्रय करनेके लिए विवश किया जाता है ! वहीं, ईसाई समुदायका कहना है कि ईसामसीहके जन्मदिनपर ‘हलाल’ मांस क्यों खाना चाहिए ? इस विवादपर कई प्रकारकी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं । वहीं ‘आईयूएमएल’ने इसे राज्यमें मुसलमान लोगोंकी मांसकी आपणियोंका (दुकानोंका) बहिष्कार करनेके लिए उठाया गया एक पग बताया ।
उल्लेखनीय है कि ‘झटका सर्टिफिकेशन अथाॅरिटी’के अध्यक्ष रवि रंजन सिंह बताते हैं कि ‘झटका‘ विधि हिन्दुओं, सिखों आदि भारतीय, धार्मिक परम्पराओंमें ‘बलि/बलिदान’ देनेकी पारम्परिक पद्धति है । इसमें पशुकी ‘गर्दन’पर एक झटकेमें वारकर रीढकी नस और मस्तिष्कका सम्पर्क काट दिया जाता है, जिससे पशुको मरते समय वेदना न्यूनतम होती है । इसके विपरित, ‘हलाल’में पशुकी गलेकी नसमें चीरा लगाकर छोड दिया जाता है और रक्त बहनेसे वह तडप-तडपकर मरता है ।
          वैसे तो ‘झटका’ हो या ‘हलाल’, किसी भी ढंगसे किसी भी पशुको मारना व खाना ही अपने आपमें आमनवीय एवं अप्राकृतिक है और उसके ऊपर इस प्रक्रियामें किसी एक ही समुदायके लोगोंको ‘रोजगार’ देना भी अपने आपमें असवैंधानिक है; इसलिए हिन्दुओंद्वारा ईसाइयोंके साथ इसका विरोध एकदम उचित है । इस जिहादी समुदायको पाठ पढानेके लिए किसीसे भी सहयोग लेना सर्वथा उचित होगा । केरल शासनको चाहिए कि प्रदेशकी एक बडी जनसङ्ख्याको जब ‘हलाल’से समस्या होनेसे प्रदेशमें इसपर विधि सम्मत रोक लगाए ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया


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