केरलके वामपन्थी शासन ‘सीएए’ विरोधके प्रदर्शनकारियोंकी प्राथमिकियां करेगा निरस्त


२७ फरवरी, २०२१
  केरलके वामपन्थी ‘एलडीएफ’ शासनने ‘सीएए’ विरोधी प्राथमिकियां निरस्त करनेका निर्णय लिया है । कुछ समय पश्चात विधान सभाके चुनावोंकी राजनीति करते हुए, वामपन्थी शासनने इसका निर्णय लिया है । केरलके कांग्रेस दलने भी इस निर्णयका अनुमोदन किया है ।
  सबरीमलाके प्रकरणमें ६८ सहस्र श्रद्धालुओंके विरुद्ध परिवाद प्रविष्ट कराए गए थे । ‘नायर सर्विस सोसाइटी’ने प्रदर्शनकारियोंके विरुद्ध लिखे गए प्रकरणको निरस्त करनेके लिए निवेदन किया गया था । उन्होंने राज्यभरमें नामजप यात्रा चलाई थी । केरलकी कांग्रेसने इसे राजनीतिका प्रकरण बनाकर, सबरीमलाके श्रद्धालुओंके पक्षमें निर्णय लेनेका वचन दिया था ।
  सबरीमलामें प्रवेशके लिए सर्वोच्च न्यायालयने अनुमति दी थी । इस निर्णयके विरोधमें ३३०० लोगोंको बन्दी बनाया गया था तथा १७ सहस्र प्रकरण प्रविष्ट किए गए थे । सबरीमला समितिने कहा है कि वामपन्थी शासन आंखोंमें धूल झोंकनेका कार्य कर रहा है । भाजपाने भी सबरीमलाको इस प्रकार घसीटनेका प्रकरण बताया है ।
     केरल शासन वस्तुतः ‘सीएए’ विरोधियोंके पक्षमें रही है । मुख्यमन्त्री पिनराई विजयनने स्वयं कई बार स्पष्ट कहा है कि ‘सीएए’ विरोधके प्रदर्शनकारियोंपर कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी । देशविरोधी वामपन्थी शासनपर किसी प्रकारका भी विश्वास करना कठिन होगा । इसके लिए केवल हिन्दू राष्ट्र ही एक मात्र विकल्प हो सकता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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