झारखण्डमें कोरवा समुदाय ईसाईयोंके धर्मान्तरणसे चिन्तित


०२ फरवरी, २०२१
     ईसाई धर्मान्तरणकी घटनाओंसे झारखण्डका कोरवा समाज व्यथित है । आदिम जनजातिको बहला-फुसलाकर, लोभ-लालच देकर और बात न बननेपर धमकाकर भी हिन्दू धर्म छोडकर ईसाई बननेको कहा जाता है ।
झारखण्डमें लालच देकर धर्मान्तरणका खेल ईसाई मिशनरियोंद्वारा खेला जा रहा है, जिसमें जनजातीय समूहोंको विशेष रूपसे लक्ष्य बनाया जा रहा है । गढवा स्थित धुरकी प्रखंडके खाला गांवमें ऐसे २ दशकाधिक परिवारोंने ईसाई धर्म अपना लिया है । कालान्तरमें कोरवा समाजकी एक बैठक हुई, जिसमें गांवके ३ परिवारोंको ईसाई बननेके लिए समाजसे बहिष्कृत किया गया । साथ ही आर्थिक और शारीरिक दण्ड भी दिया गया ।
धर्म परिवर्तन करनेवाले परिवारके यहां विवाह, जन्म-मरण व अन्य सामाजिक कार्योंमें समुदायके किसी भी व्यक्तिके भाग लेनेपर २५,०५१ रुपएका आर्थिक व ५१ लाठीका शारीरिक दण्ड निर्धारित किया गया है ।
आदिम जनजातिको बहला-फुसलाकर, लोभ-लालच देकर ईसाई बननेको कहा जाता है । सबसे पहले ४ भाइयोंके एक परिवारको यहां ईसाई बनाया गया, फिर ५वेंपर दबाव डाला जा रहा है ।

        देश एवं कई प्रदेशोंके शासनमें आदिवासीका ईसाईकरणका कार्य कई दशकोंसे हो रहा था, जिसे अब एक सीमातक मोदी शासनने ‘एनजीओ’की ‘फंडिग’को रोककर धर्मान्तरण रोकनेका प्रयास किया है और कुछ सीमातक इसमें सफलता भी मिली है; परन्तु पूर्ण रूपसे इस आदिवासी समुदाय एवं भारतीय संस्कृतिको बचानेके लिए बहुत बडे प्रयास करने होंगे । अवश्यकता है कि देशका वह नागरिक, जो अपने देश एवं संस्कृतिसे प्रेम करता है, वह सजग होकर अपना योगदान दे और जहां भी कोई ‘मिशनरी’ इस प्रकारके कार्यमें संलग्न मिले, उसे विधानके अनुसार दण्ड भी दिलवाए और जो धनाढ्य लोग हैं, वह आगे आकर आदिवासी समुदायकी आर्थिक सहायता भी करें । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ

स्रोत : ऑप इंडिया



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