सर्वोच्च न्यायालयकी अवमाना और अपशब्दोंके पश्चात कुणाल कामरापर प्रविष्ट आपराधिक अभियोग प्रकरण, ‘अटॉर्नी जनरल’ने दी स्वीकृति


१० मार्च, २०२२
      सर्वोच्च न्यायालयके विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी करनेवाले कथित ‘कॉमेडियन’ कुणाल कामरापर सर्वोच्च न्यायालयके अपमानपर आपराधिक अभियोग चलानेकी अनुमति पूर्वसे ही थी । अब इसमें कामराके नूतन ‘ट्वीट’ और ‘गाली’वाला दृश्यपट भी सम्मिलित होगा । ‘अटॉर्नी जनरल’ के.के. वेणुगोपालने इसकी अनुमति दे दी है । इस आदेशका एक पत्र ७ मार्चको (सोमवारको) प्रकाशित हुआ है ।
      सर्वोच्च न्यायालयने दिसम्बर २०२० में कुणाल कामराको एक ‘लिबरल’ ‘हीरो’ या ‘शहीद’ बननेके प्रयासमें न्यायपालिकाके विरुद्ध अवमाननावाली टिप्पणी करनेके पश्चात कार्यवाहीको लेकर एक विज्ञप्ति (नोटिस) प्रकाशित किया था । अपने एक ‘ट्वीट’में कामराने तत्कालीन ‘सीजेआई’ अरविंद बोबडेको अपनी मध्यमा अंगुली दिखाई थी और दूसरे ‘ट्वीट’में उन्होंने सर्वोच्च न्यायालयको भगवा रंगमें रंगते हुए आरोप लगाया था कि यह ‘एनडीए’ शासनकी कठपुतली बन गई है ।
     सर्वोच्च न्यायालयमें पूर्वसे ही चल रहे अपने अवमानना अभियोगको लेकर कामराने इसी वर्ष मार्च महीनेमें अपशब्दोंका प्रयोग किया । कामरा यहीं नहीं रुके । उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय और न्यायधीशोंके विरुद्ध निरन्तर ‘ट्वीट’ किए ।
      कुणाल कामरा जैसी विकृत मानसिकताके लोगोंको त्वरित ही कारावासमें भेजना चाहिए । ऐसे लोग भारत जैसे सभ्य समाजके लिए महामारी रोगके विषाणुओंकी भांति होते है । इनको प्रतिबन्धित करना ही देशके भविष्यके लिए हितकर है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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