जुलाई २६, २०१८
देशभरमें विष भक्षण वाले लोगोंमें आधेसे अधिक अवयस्क सम्मिलित हैं ! इनमेंसे अधिकतर अवयस्क अज्ञानतावश विष भक्षण कर लेते हैं । ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’के (एम्स) समस्या निवारण केन्द्रपर (कॉल सेण्टर) प्रविष्ट हुई परिवादपर हुए अध्ययनमें यह बात उजागर हुई है ।
अध्ययनके अनुसार देशमें विष भक्षणकी परिवादमें ६० प्रतिशत परिवाद १८ वर्षसे अल्प आयुके युवाओंकी आई हैं । परिवादोंमें ६६ प्रतिशत लोगोंने अज्ञानतामें विष भक्षण किया और इनमें सबसे अधिक बच्चे सम्मिलित हैं । ‘एम्स’में वर्ष २००५ में देशभरमें विष भक्षणकी घटनाओंके लिए एक ‘कॉल सेण्टर’ स्थापित किया गया था ।
वर्ष २००५ से अबतक यहां लगभग १६४२० परिवाद प्रविष्टकी गई हैं । यह परिवाद देशके भिन्न-भिन्न भागोंसे आईं हैं । इनपर अध्ययनके पश्चात यह निष्कर्ष निकला है कि देशमें अवयस्क और बच्चोंके साथ, विष खाने जैसी गम्भीर घटनाएं सबसे अधिक हो रही हैं ।
‘एम्स’के समस्या निवारण केन्द्रपर (काल सेण्टर) मिली विष भक्षणकी परिवादमें ६६ प्रतिशत लोगोंने अज्ञानवश (अनजाने) विष खाया । इनमें ४५ प्रतिशत प्रकरण १२ वर्षसे अल्प आयुके बच्चोंके हैं । इस अध्ययनके अनुसार विष खानेके प्रकरणमें घरमें मच्छर और खटमल मारनेकी विषकारक औषधियोंका सबसे अधिक प्रयोग हुआ है ।
‘एम्स’के पूर्व वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वाई के गुप्ताका कहना है कि समस्या निवारण केन्द्रकी (काल सेण्टर) परिवादकी समीक्षाके पश्चात चौंकान्ने वाली स्थिति देखनेको मिली है । अवयस्क बच्चे और युवाओंके साथ इस समय विष सेवनकी घटनाएं हो रही हैं।
उन्होंने बताया कि घरमें रखे मच्छर, खटमल, दीमक मारने वाली औषधियोंको लेकर कुटुम्ब गम्भीर नहीं रहते, इसका परिणाम यह है कि बच्चे भी इस रोगका लक्ष्य बन रहे हैं । डॉ. गुप्ताने यह भी बताया कि कैरोसिन, पेण्ट थिनर जैसे रसायनोंकी परिवाद बहुत अल्प मिली हैं, जबकि सबसे अधिक घरोंमें प्रयुक्त होने वाली कीटनाशक दवाएं, फर्श क्लीनर, कार क्लीनरके कारण से घटनाएं अधिक हुई हैं ।
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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