महाराष्ट्रमें ‘कोरोना’के भयङ्कर रूपसे जूझ रहे २८१ चिकित्सकोंने मुख्यमन्त्री उद्धव ठाकरेको पत्र लिखकर मांगी आत्महत्याकी अनुमति
८ जुलाई, २०२१
टीवी ९ मराठीकी प्रस्तुतिके अनुसार, २८२ आयुर्वेदिक चिकित्सकोंने महाराष्ट्रके मुख्यमन्त्री उद्धव ठाकरेको पत्र लिखकर वचनभङ्ग तथा महाराष्ट्र शासनद्वारा उनके साथ किए गए अपमानजनक व्यवहारके कारण अपना आत्महत्या करनेकी अनुमति मांगी है ।
पत्रमें चिकित्सकोने राज्य शासनद्वारा विशेष रूपसे ‘कोरोना’ सङ्कटके मध्य आयुर्वेदिक चिकित्सकोंके साथ दुर्व्यवहारके विषयमें खेद व्यक्त किया है । साथ ही पिछडे आदिवासी क्षेत्रोंमें लम्बे समयतक नियुक्तिपर निराशा व्यक्त करते हुए, ‘बीएएमएस’ चिकित्सकोंने कहा कि वे पिछले दो दशकोंसे १८ आदिवासी जनपदमें लोगोंकी सेवा कर रहे हैं, अधिकतर दूर-दराजके ऐसे गांवोंमें जाते हैं, जहां आरम्भिक सुविधाएं भी नहीं हैं; परन्तु शासन उनके साथ भेदभाव कर रहा है ।
आयुर्वेद चिकित्सकोंके साथ न केवल महाराष्ट्रमें वरन, समूचे देशमें भेदभाव हुआ है और इसके उत्तरदायी केवल शासकगण ही हैं । आयुर्वेदको सम्मान देनेके लिए भारत शासनने आयुष मन्त्रालयकी स्थापना की है; किन्तु उसकी कोई विशेष उपलब्धि नहीं है । भारत शासन आयुर्वेदको प्राथमिकता दे, ऐसी मांग सभी हिन्दू करें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
Leave a Reply