जय श्रीरामके उद्घोषसे भडकीं ममता बनर्जी, प्रधानमन्त्री मोदीसे कहा कि बुलाकर अपमानित करना ठीक नहीं
२४ जनवरी, २०२१
ममता बनर्जीने पराक्रम दिवस समारोहको सम्बोधित करनेसे मान कर दिया । उन्होंने कहा कि किसीको बुलाकर उसका अपमान करना ठीक नहीं । वस्तुतः, जैसे ही ममता बनर्जी मंचपर भाषण देने पहुंचीं, कुछ लोग तुरन्त ‘जय श्रीराम’ और ‘भारत माताकी जय’के उद्घोष करने लगे, जिससे वो रूष्ट हो गईं । बंगालमें नेताजीकी १२५वीं जयन्तीपर प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीकी उपस्थितिमें ‘विक्टोरिया मेमोरियल’में पराक्रम दिवसका समारोह चल रहा था । इस अवसरपर राज्यकी मुख्यमन्त्री ममता बनर्जी भी पहुंची थी । वहीं जब ममता बनर्जी मंचपर लोगोंको सम्बोधित करने पहुंची, वैसे ही पूरा कार्यक्रम स्थल ‘जय श्रीराम’ और ‘भारत माताकी जय’के उद्घोषसे गूंज उठा । ममता बनर्जीने कहा, “शासनके कार्यक्रमकी गरिमा होनी चाहिए । यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है । आपको किसीको आमन्त्रित करनेके पश्चात उसको अपमानित करना शोभा नहीं देता है । विरोधके रूपमें मैं कुछ भी नहीं बोलूंगी ।” इसके पश्चात वह ‘जय हिन्द-जय बांग्ला’ बोलकर तुरन्त मंचसे नीचे उतर गईं ।
ममता बनर्जीका विशेष समुदायके प्रति लगाव तो जगविदित है । जिस राजनैतिक परिवेशसे ममता बनर्जी आई है, उस दलने सदैव मुसलमानोंके तुष्टीकरणकी राजनीति की है और ममता बनर्जी भी अपनी राजनीति इसी सिद्धान्तपर कर रही हैं और यदि रामका नाम लेना ममताजीका अपमान है, तो रैलियोंके मध्य ‘अजान’ पढना और हिन्दुओंके करके धनसे मस्जिदों, मदरसोंको बढावा देना और ‘अजान’ व ईद आदि आयोजित कराना तो अपराध है, जो दण्डनीय भी है । जब वे यह सब कर सकती हैं, तो राम नामपर यह ढोंग क्यों कर रही हैं ? राजनीति करते-करते मानसिक दिवालियेपनकी सीमातक पहुंचनेवालीं सम्भवतः ममताजी प्रथम नेता होंगी । यह उनके कर्मोंका ही परिणाम है, जो अभी तो केवल आरम्भ ही है । अभी पराजयके रूपमें उन्हें बहुत कुछ देखना है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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