विवाह उपरान्त प्रेमी-प्रेमिकाके साथ रहना अपराध नहीं, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालयका आदेश
९ सिंतबर, २०२१
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालयने विवाह उपरान्त सम्बन्धोंपर एक विशेष निर्णय सुनाया है, जिसके अनुसार, पूर्वसे ही विवाहित व्यक्ति अब अन्य किसी प्रेमीके साथ ‘लिव इन रिलेशन’में रह सकता है एवं ऐसा करना अब अपराधकी श्रेणीमें भी नहीं होगा । समाचारके अनुसार, ऐसे प्रकरण अन्तर्गत एक प्रेमी युगल अपनी सुरक्षा हेतु उच्च न्यायालय पहुंचा था । उन्होंने याचिका प्रविष्ट की थी कि उन्हें न्यायालयद्वारा सुरक्षा प्रदान की जाए । इसीपर प्रतिक्रिया देते हुए, न्यायालयने यह निर्णय सुनाया है व प्रेमी युगलको सुरक्षा प्रदान करनेका आश्वासन दिया है । वहीं, प्रयागराज उच्च न्यायालयने ऐसे ही प्रकरणपर निर्णय सुनाते हुए कहा था कि ‘लिव इन रिलेशन’में रह रहे ऐसे प्रेमी युगलको सुरक्षा नहीं दी जा सकती, जिसमें से एक पूर्वसे ही विवाहित हो । इसमें, उच्च न्यायालयने देशके ‘सामाजिक ताने-बाने’का तर्क रखा था । वहीं, राजस्थान उच्च न्यायालयने भी, गत माह ऐसा ही एक निर्णय सुनाया था, जिसमें प्रयागराज उच्च न्यायालयवाले आदेशका संज्ञान लेते हुए ‘सामाजिक ताना-बाना’ ही आधार बताया था । अब पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालयके न्यायाधीश, अमोल रतन सिंहकी पीठने यह निर्णय पारित किया है व खन्ना जनपदके ‘एसएसपी’को आदेश दिया है कि आवेदन करनेवाले प्रेमी युगलकी सुरक्षा, वह सुनिश्चित करे । याचिका प्रविष्ट करनेवाले व्यक्तिने बताया था कि उसकी पत्नी व उसीके घरवाले उनकी हत्या करने हेतु प्रयासरत हैं । वहीं, ‘पुलिस’द्वारा भी उन्हें निरन्तर प्रताडित किया जा रहा था ।
देशकी न्याय प्रणाली, समाजको उत्थानके स्थानपर उसे पतनकी ओर अग्रसर कर रही है । वहीं, राष्ट्रमें पाश्चात्य संस्कृतिके प्रभावको न्यून करने हेतु धर्म साम्राज्यकी स्थापना, अब अपरिहार्य दृष्टिगत हो रही है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
Leave a Reply