मार्च ३, २०१९
राष्ट्रीय एवं आतंरिक सुरक्षाके प्रकरणपर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेसके मध्य आरोप-प्रत्यारोप तीव्र हो चुका है । मंगलवार, २ मार्चको कांग्रेसका घोषणापत्र जारी होनेके पश्चित राष्ट्रीय सुरक्षाको लेकर भाजपा और केन्द्र शासनके मन्त्री दोनों कांग्रेसपर आक्रामक हैं । भाजपाका आरोप है कि कांग्रेसका घोषणापत्र सैनिकोंका ‘अपमान’ करनेवाला है । रक्षा मन्त्री निर्मला सीतारमणने बुधवार, ३ मार्चको कहा कि कांग्रेस सुरक्षाबलोंको आतंकवाद विरोधी अभियानोंके समय मिली छूटको दुर्बल कर रही है । रक्षा मन्त्रीके वक्तव्यके पश्चात पूर्व वित्त मन्त्री पी चिदंबरमने पलटवार किया ।
कांग्रेसने अपने घोषणापत्रमें कहा है कि सत्तामें आनेपर वह देशद्रोहके विधानको समाप्त करेगी और ‘सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम’की (अफस्पा) समीक्षा और उसमें संशोधन करेगी !! कांग्रेसके इन दोनों घोषणाओंकी आलोचना हो रही है । सुरक्षा विशेषज्ञोंका कहना है कि इन दोनों से देशकी आंतरिक सुरक्षा दुर्बल होगी और देश-विरोधी गतिविधियोंको बल मिलेगा । कांग्रेसके घोषणापत्रपर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मन्त्री अरुण जेटलीने कहा कि ऐसा लगता है कि घोषणापत्रके कुछ अंशोंको ‘टुकडे-टुकडे’ गैंगने सज्ज किया है !
रक्षा मन्त्रीने पूछा, “क्या ‘अफस्पा’में संशोधन करनेकी बात कहना उचित है ? यह सशस्त्र बलोंको दुर्बल करनेका एक प्रयास है । आतंकवाद विरोधी अभियानोंके समय सुरक्षाबलोंको मिली सुरक्षाको कांग्रेस दुर्बल करनेका प्रयास कर रही है ।” इसके पश्चात चिदंबरमने कहा, “यह भाजपा है, जो दो महत्त्वपूर्ण प्रकरणपर पांच वर्षोंतक कोई कार्यवाही नहीं की और इसके कारणसे भारतपर आतंकवादी आक्रमणकी आशंका बढ गई ।” चिदंबरमने पूछा कि पांच वर्षोंमें ‘नैटग्रिड और नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर’को (एनसीटीसी) पांच वर्षों तक सक्रिय क्यों नहीं किया गया ?
मंगलवारको जेटलीने कांग्रेसके घोषणापत्रको ‘भारतको दुर्बल’ बनानेवाला बताया । उन्होंने कहा, “इस घोषणापत्रमें कुछ विचार भयानक हैं, जो देशको ‘बाल्कनीकरण’की (देशको छोटे-छोटे भागोंमें विभाजित करना) ओर ढकेल देंगें । इसमें भारतके विघटनकी योजना है, जो पार्टी इसप्रकारकी घोषणा करती है, उसे एक भी वोट पानेका अधिकार नहीं है ।”
“राष्ट्रीय सुरक्षाको नष्ट करनेका कार्य कोई राष्ट्रीय दल तो नहीं कर सकता है; परन्तु कांग्रेसको इसमें अत्यधिक अनुभव है; क्योंकि उंगलीपर समस्याएं गिनना आरम्भ कीजिए, वे न केवल कांग्रेसकी देन हैं, वरन उनका अच्छेसे पोषण भी किया है । गत दिवसोंमें भी पृथकतावादी नेताओं और इस्लामिक संस्थाओंपर कार्यवाही हुई है, जिनके आतंकी दलोंसे सम्पर्क थे और अतिशयोक्ति नहीं होगी कि इनका संरक्षक कांग्रेस ही थी; अन्यथा आपके नीचे कोई आतंकवादी गतिविधि करता रहे और आपको बोध ही न हो, यह तो असम्भव प्रतीत होता है । कांग्रेस अब सेनाकी शक्तिको अल्प करना चाहती है । देश एक साथ खडा होकर कांग्रेसके इन कृत्योंका विरोध करें और राष्ट्रकी सुरक्षासे खेलनेवाले ऐसे दल पुनः सत्तामें लाना है अथवा नहीं, यह विवेकसे निर्णय लें ! आलू प्याज तो महंगे और सस्ते होते रहेंगें; परन्तु यदि राष्ट्र चला गया तो कुछ भी नहीं रहेगा, यह ध्यान रखें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : टाइम्स नाउ
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