पुलिस अधिकारियोंका अपहरणकर मस्जिदमें ले गए ‘डीएसपी’को किया प्रताडित, शासनसे मोलभावके पश्चात पाकिस्तानमें छोडे गए बन्धक
२० अप्रैल, २०२१
रविवारको एक वक्तव्यमें पंजाब पुलिसने कहा था, ”आज प्रातः बदमाशोंने नवाकोट पुलिस स्टेशनपर आक्रमण कर दिया । इसके पश्चात वे ‘डीएसपी’का अपहरणकर उन्हें ‘मरकज’में ले गए । कट्टरपन्थी एक तेल ‘टैंकर’के साथ लगभग ५०,००० लीटर पेट्रोल भी ‘मरकज’में लेकर गए थे ।
प्रतिबन्धित मुसलमानी सङ्गठन ‘तहरीक-ए-लब्बैक’ पाकिस्तानने अपहृत ११ पुलिसकर्मियोंको मुक्त कर दिया है । पाकिस्तानके पंजाब प्रान्तके शासनके साथ मोलभावके पश्चात यह पग उठाया गया है । इन पुलिसकर्मियोंको लाहौरमें हिंसक झडपोंके पश्चात रविवार १८ अप्रैल २०२१ को बन्धक बना लिया गया था । समाचारके अनुसार, फ्रांसके राजदूतको देशसे बाहर निकालनेकी ‘शर्त’पर पुलिस अधिकारियोंको मुक्त किया गया है ।
सोमवारको पाकिस्तानके गृह मन्त्री शेख राशिद अहमद ने ११ पुलिसकर्मियोंकी मुक्तिकी पुष्टि की है । उन्होंने ‘ट्विटर’पर एक ‘वीडियो’ साझाकर कहा, “टीएलपीके साथ वार्ता आरम्भ हो गई है । पहला सत्र सफलतापूर्वक रहा और दूसरे सत्रकी वार्ता ‘सेहरी’के पश्चात होगी ।
पाकिस्तानमें अराजकता चरमपर है । शासन और प्रशासन बहुत वर्ष पहलेसे ही वहां कार्य नहीं कर रहे है । पाकिस्तानमें अपरोक्ष रूपसे वहांकी सेना शासन करती है, १९४७ से लेकर अभीतक अधिकतर वहां सेनाका ही शासन रहा है और जब सेना सत्तामें नहीं रही, तब वहां कट्टरपन्थियोंका बोलबाला रहा है । सत्तरके दशकके मध्य जो बीज तत्कालीन ‘तानाशाह’ जिया-उल हकने बोया था, पाकिस्तान आज उसीकी फसल काट रहा है । आज वहांके कट्टरपन्थी पाकिस्तानके साथ-साथ पूरी मानवताके लिए घातक बन गए है । पूरा विश्व महामारीसे लड रहा है; परन्तु पाकिस्तानमें जिहादी परस्पर ही मर-कट रहे हैं । पाकिस्तान कर्मदण्ड भोग रहा है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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