शासनका बढा नियन्त्रण, ‘फेसबुक’ व ‘इंस्टाग्राम’ने हटाए ३.२ करोड ‘पोस्ट’
४ जुलाई, २०२१
समाजिक जालस्थानोंके नूतन विधानके अन्तर्गत ‘कू’ तथा ‘गूगल’के पश्चात अब ‘फेसबुक’ने भी शासनको अपनी प्रथम सूची सौंप दी है, जिसमें उसे प्राप्त प्रकार परिवादोंपर की गई कार्यवाहीकी सूची है ।
भारत शासनके नूतन विधानके अन्तर्गत सभी ५० लाखसे अधिक खाता धारकोंवाले जालस्थानोंको मासिक परिवाद सूची भारत शासनको सौंपते हुए यह बताना होगा कि उन्होंने अनधिकृत ‘पोस्ट्स’पर क्या कार्यवाही की है ? साथ ही उन्हें इस हेतु एक मुख्य भूमिका अनुपालन अधिकारी, एक ‘नोडल’ अधिकारी और एक परिवाद अधिकारी नियुक्त करना होगा ।
‘फेसबुक’ने १५ मई से १५ जूनतककी सूची दे दी है, जिनमें ९५% ‘पोस्ट्स’पर अर्थात लगभग ३ करोड ‘पोस्ट्स’पर कार्यवाही की है । ‘इंस्टाग्राम’ने ८०% ‘पोस्ट्स’पर अर्थात लगभग २० लाख ‘पोस्ट्स’पर कार्यवाही की है । इनमेंसे कुछ सामग्री हटा दी गई है । ‘कू’ने ५५०२ में से १२५३ पोस्ट हटा दिए हैं । इनकेद्वारा की गई कार्यवाहीमें ‘ब्लर’, ‘इग्नोर’ जैसी कार्यवाही भी सम्मिलित है । ‘गूगल’को १ अप्रैलसे ३० अप्रैलके मध्य २७००० परिवाद प्राप्त हुए थे । यहां भी कुछ सामग्री हटा दी गई है ।
‘ट्विटर’ने अभीतक केन्द्र द्वारा निर्देशित अधिकारियोंकी नियुक्ति नहीं की है । ‘ट्विटर’को ‘आईटी’ नियमोंका पालन न करनेके कारण ‘मध्यस्थता’की श्रेणीसे हटा दिया गया है । उसपर देशभरमें लगभग ६ न्यायिक आपराधिक परिवाद प्रविष्ट हुए हैं । उसकी ग्राहक सङ्ख्या लगभग १.७५ करोड है ।
सामाजिक जालस्थानोंके लिए भारत एक बडा व्यापारिक केन्द्र है । विशाल ग्राहक सङ्ख्याके कारण ‘ट्विटर’ भी भारतके विधानों अनुसार चलनेको विवश होगा । केन्द्रका सामाजिक जालस्थानोंपर यह नियन्त्रण प्रशंसनीय है । यह नियन्त्रण भारत विरोधी देशद्रोही ‘पोस्ट्स’ तथा देशमें शान्ति बनाए रखने हेतु अत्यन्त आवश्यक था । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : डू पॉलिटिक्स
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