७ सिंतबर, २०२१
मैग्सेसे पुरस्कार विजेता पत्रकार रवीश कुमारने एक बार पुनः अपनी पत्रकारिताका ‘गिरगिटिया’ रङ्ग दिखाया है । २०१३ में मुजफ्फरनगर उपद्रवके लिए, राकेश टिकैतकी आलोचना करनेवाले, रवीश कुमारने ‘एनडीटीवी इंडिया’पर अपने ‘प्राइम टाइम शो’के अन्तर्गत, इस बार हिन्दू-मुसलमान एकता बनानेके लिए ‘बीकेयू’ नेताकी प्रशंसा की है । उन्होंने राकेश टिकैतकी हिन्दुओं और मुसलमानोंके मध्य तनावपूर्ण सम्बन्धको सुधारनेके लिए प्रशंसा की । उन्होंने यहां भी, वही ‘राग अलापा’ कि २०१४ के पश्चात हिन्दुओं और मुसलमानोंके मध्य सम्बन्ध तनावपूर्ण हो गए हैं ।
कुमारने अपने कार्यक्रममें कहा, “प्रधानमन्त्री राकेश टिकैत और अन्य किसान नेताओंसे उनके परिवादोंको सुननेके इच्छुक नहीं हैं; यद्यपि वह व्यक्तिगत रूपसे खिलाडियोंको बुलाते हैं एवं उन्हें बधाई देते हैं ।” राकेश टिकैत जैसे नेता एवं अन्य किसान नेता, किसान विरोधके माध्यमसे, हिन्दू-मुसलमान एकता बना रहे हैं । प्रधानमन्त्रीको उनसे मिलने और उनके परिवादोंका समाधान करनेके लिए अपना समय देना चाहिए ।”
ये वही रवीश कुमार हैं, जिन्होंने वर्ष २०१३ में हुए मुजफ्फरनगर उपद्रवोंके लिए राकेश टिकैतको उत्तरदायी ठहराया था । उन्होंने कहा था, ”उत्तर प्रदेशके मुजफ्फरनगरमें एक बैठक आयोजित की गई थी, जिससे इस क्षेत्रमें तनाव उत्पन्न हो गया है । बैठकमें जो चर्चा हुई, उसे सार्वजनिक नहीं किया गया; परन्तु ‘पुलिस’ने कहा कि उन्होंने ४ ‘भाजपा’ नेताओं, दो ‘बीकेयू’ नेताओं, राकेश टिकैत और नरेंद्र टिकैतपर, एक कांग्रेस नेताके विरुद्ध ‘भडकाऊ’ भाषण देनेके आरोपमें प्राथमिकी प्रविष्ट की है ।” २०१३ के कुमारने अपने कार्यक्रममें सङ्केत दिया था कि उन्होंने राकेश टिकैतको उन व्यक्तियोंमेंसे माना है, जो मुजफ्फरनगरकी बैठकके पश्चात हुए हिन्दू-मुसलमान उपद्रवोंके बीज बोनेके लिए उत्तरदयी थे ।
आजकलकी समाचार वाहिनियोंमें, कुछ रवीश कुमार जैसे पत्रकारोंने, समाचार जगतकी प्रमाणिकताको ही सन्देहके घेरेमें ला खडा किया है । ऐसे पत्रकार, देशविरोधी पत्रकारोंकी श्रेणीमें आते हैं, इनका सभीको सामूहिक रूपसे बहिष्कार करना चाहिए एवं इनके किसी भी समाचारको महत्त्व नहीं देना चाहिए । यही, ऐसे लोगोंके लिए उचित दण्ड होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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