साधनाके विविध दृष्टिकोण


प्रार्थना, आरम्भिक अवस्थामें शब्दजन्य होती है और साधनाकी प्रगत अवस्थामें वह नि:शब्द हो जाती है अर्थात प्रार्थनाके समय मात्र शरणागत भाव रह जाता है ।



Leave a Reply

Your email address will not be published.

सम्बन्धित लेख


© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution