शारदा चिट फंडका २००९ से २०१९ तकका कुचक्र !!


जनवरी ४, २०१९


पश्चिम बंगालकी चिटफण्ड कम्पनी ‘शारदा ग्रुप’द्वारा लोगोंको ठगनेके लिए कई लुभावने अवसर दिए गए । कुछ ही माहमें धन दोगुणा करनेका स्वप्न दिखाया । लगभग १० लाख लोगोंसे पैसे लिए गए और जब लौटानेकी बारी आई तो कम्पनीपर ताला लगा दिया !

* आरम्भमें, ‘शारदा ग्रुप’ने सुरक्षित ‘डिबेंचर (प्रतिज्ञापन) और रिडीमेबल (प्रतिदेय)’ अधिमान्य बॉन्ड जारी करके लोगोंसे धन एकत्र किया ।
* इसके पश्चात वर्ष २००९ में बाजार नियामक ‘सेबी’का ध्यान शारदा ग्रुपपर गया । इसके पश्चात इसने कई निवेश योजनाओंको बढावा देकर पैसा एकत्र करना आरम्भ किया, जिसमें पर्यटन पैकेज, फॉरवर्ड ट्रैवल, होटल आरक्षण, क्रेडिट स्थानान्तरण, रियस एस्टेट, इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस और मोटरसाइकिल निर्माणसे जुडी कई योजनाएं सम्मिलित थीं ।
* वर्ष २००९ में ही तत्कालीन सांसदों, सोमेन्द्र नाथ मित्रा और अबू हसीम खान चौधरी और तत्कालीन राज्य उपभोक्ता प्रकरणके मन्त्री साधना पाण्डेकी ओरसे चेतावनी दी गई थी ।
* बंगाली फिल्म उद्योगमें निवेश किया – स्थानीय दूरभाष वाहिनीयों (चैनलों) और समाचार पत्रोंका अधिग्रहण और उसकी स्थापना की ।
* २०११ में, ग्लोबल ऑटो, लैंडमार्क सीमेंट कम्पनी क्रय की । इसके अतिरिक्त कई दूरभाष वाहिनी, जिनमें ‘तारा न्यूज, म्यूजिक बांग्ला, पंजाबी, टीवी साउथ ईस्ट एशिया, चैनल १०, एक एफएम स्टेशन’ सम्मिलित थे ।
* दिसम्बर २०१२ में गुटद्वारा निवेश योजनाएं आरम्भ की गई ।
* २०१३ में एक पोंजी योजनाका ज्ञान हुआ जो २३९ से अधिक कम्पनियोंके सहयोगसे शारदा ग्रुपके द्वारा चलाई जा रही थी ।
* शारदा ग्रुपने अप्रैल २०१३ में ध्वस्त होनेसे पूर्व जमाकर्ताओंद्वारा १.७ मीलियनसे अधिक धनराशि एकत्र की ।
* शारदा ग्रुपने कई योजनाएन चलाईं और अपनी पंजीकृत २३९ कम्पनियोंमेंसे ४ कम्पनी, जिसमें ‘शारदा टूर एण्ड ट्रैवल्स, शारदा रॉयल्टी, शारदा हाउसिंग और शारदा गार्डन रिजार्टस’के माध्यमसे लोगोंका पैसा एकत्र किया ।  
* २०१३ तक अपने स्वयंके समाचार विभागमें लगभग ९८८ कोटि रुपयोंका निवेश किया । इसमें लगभग १५०० पत्रकार और ८ समाचार-पत्र सम्मिलित थे ।
* १७ अप्रैल २०१३ को ६०० शारदा कलेक्शन एजेंट (मध्यस्थ) तृणमूल कॉन्ग्रेसके कार्यालयके सामने एकत्र हुए और भ्रष्टाचारपर कार्यवाहीकी मांग की ।
* १८ अप्रैल २०१३ को सुदीप्तो सेनको बन्दी बनानेके लिए आदेश जारी किया गया । भ्रष्टाचार सामने आनेपर सुदीप्तो सेन लापता हो गए ।
* २२ अप्रैल २०१४ शारदा ग्रुपके विरुद्घ २२२ प्रकरण प्रविष्ट किए गए । ‘सेबी’के एक अधिकारीने ‘शारदा ग्रुप’से कहा कि वह किसीभी प्रकारकी जमा धनराशि एकत्र करनेपर विराम लगाए और तीन माहके भीतर एकत्र किया गया धन लोगोंको वापस करे ।
* २३ अप्रैल २०१३ को जम्मू-कश्मीरसे सुदीप्तो सेन और उनका दाया हाथ कहलानेवाली देबजानी मुखर्जीको बन्दी बनाया गया ।
* फरवरी २०१४ में ‘शारदा ग्रुप’के स्वामी सुदीप्तो सेनको शेष ‘पीएफ’ भुगतान न करनेके लिए दोषी ठहराया गया ।
* अप्रैल २०१४ में ‘शारदा चिट फंड’ प्रकरण उच्चतम न्यायालय पहुंचा ।
* मई २०१४ में न्यायालयने सीबीआईको जांचके आदेश दिए ।
* २०१४ में ईडीमें (प्रवर्तन निदेशालय) ‘पीएमएलए’के अन्तर्गत, फर्म और उसके अध्यक्ष गौतम कुंडू सहित अन्यके विरुद्घ प्राथमिकी प्रविष्ट की ।
* २०१५ में सीबीआईने सुदीप्तो सेनके विरुद्घ एक अन्य आरोपपत्र (चार्जशीट) प्रविष्ट किया ।
* ११ फरवरी २०१५ को तृणमूलके मन्त्री मदन मित्राकी जमानत याचिका रद्द हुई । परिवहन मन्त्री रहे मदन मित्रापर सीबीआईने शारदा ग्रुपके निकटवर्ती होनेकी शंका प्रकट की थी ।
* मार्च २०१६ में ‘ईडी’ने ‘शारदा चिट फंड’में प्रथम आरोपपत्र प्रविष्ट किया ।
* सितम्बर २०१६ में सीबीआईद्वारा ९० दिनोंके भीतर आरोपपत्र प्रविष्ट न किए जानेके कारण कोलकाता उच्च न्यायालयने ‘शारदा ग्रुप’के स्वामी सुदीप्तो सेनको जमानतपर छोड दिया ।
* ९ सितम्बर २०१६ में कोलकाता उच्च न्यायालयने मतंग सिंह और मनोरंजना सिंहकी जमानत याचिका रद्द की । उल्लेखनीय है कि मतंग सिंह और मनोरंजना सिंहके विरुद्घ चिट फंड भ्रष्टाचारके अन्तर्गत पैसोंके भ्रष्टाचारका आरोप लगा था । इसके अतिरिक्त सीबीआईद्वारा पूछे गए प्रश्नोंका उत्तर मनोरंजनाने ठीकप्रकारसे नहीं दिया था ।
* २१ अक्टूबर २०१६ को न्यायमूर्ति जगदीश सिंह केहर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्राकी अध्यक्षतावाली शीर्ष न्यायालयकी एक खण्डपीठने मतंग सिंह और मनोरंजना सिंहके जमानत सम्बन्धित आवेदनपर ईडी और पश्चिम बंगाल शासनको अधिसूचना जारी की ।
*२०१७ में टीएमसीके सांसद कुणाल घोषको शारदा भ्रष्टाचारमें संलिप्तताके चलते दलसे निलम्बित किया गया ।
* ११ जनवरी २०१९ को सीबीआईने पूर्व केन्द्रीय मन्त्री और कांग्रेस नेता पी चिदम्बरमकी पत्नी नलिनी चिदम्बरमके विरुद्घ आरोपपत्र प्रविष्ट किया गया ।
* ३१ जनवरी २०१९ को सीबीआईने ममता शासनद्वारा जांचमें बाधा उत्पन्न करनेका आरोप लगाया ।
* ३ फरवरी २०१९ की रात्रि, प.बंगालकी मुख्यमन्त्री ममता बनर्जी प्रकरणपर कोलकाताके पुलिस कमिश्नरसे पूछताछ करने सम्बन्धित सीबीआईकी कार्यवाहीके विरुद्घ धरना दिया ।

 

“तो ऊपरसे नीचेतक सभी सम्मिलित हैं; इसलिए ही इतना विरोध हो रहा है ! शशि थरूरने कुछ दिवस पूर्व संगम, गंगा, योगी व साधुओंके विरुद्घ अनर्गल वक्तव्य दिया था तो इसमें उनके दलके नेता चिदम्बरमसे लेकर उनके गुप्त सहयोगियोंका नाम है, अब वे कुछ कहेंगें ? वस्तुतः यह ऊपरसे नीचेतक भ्रष्टाचारमें सम्मिलित होनेकी संस्कृतिका जनक इस देशमें एक ही दल है, तभी तो स्वतन्त्रतासे अबतक इस राष्ट्रकी यह दुर्दशा है । भारतकी जनता भ्रष्टाचारियोंको अपना रक्षक चुनकर भेजती है और वह रक्षक भक्षक ही होता है तो देश व राज्य आगे बढे तो कैसे ? इस संस्कृतिको समाप्त करनेके लिए अब ऐसे धर्मनिष्ठ लोगोंकी आवश्यकता है, जो शासनको सम्भाल सकें और उसके लिए हिन्दू राष्ट्र ही एकमात्र पर्याय है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : ऑप इण्डिया



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