उदीरितोऽर्थः पशुनापि गृह्यते
हयाश्च नागाश्च वहन्ति देशिताः ।
अनुक्तमप्यूहति पण्डितो जनः
परेङ्गितज्ञानफला हि बुद्धयः ॥ – हितोपदेश
अर्थ : जिसे स्पष्ट रूपसे बताया जाये वह तो घोडे एवं सर्प जैसे पशु भी ग्रहण कर समझका उसका पालन कर लेते हैं , बुद्धिमान या विवेकी तो उसे कहा जाएगा जो बिना बोले समझ लें | विवेकशेल होनेका अर्थ है दूसरेके मनके विचारोंको समझ लेना !
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