नामजपका महत्त्व


तन्मुखम तू महत्तिर्थम तन्मुखम क्षेत्र मेव च, यनमुखे राम रामेति तन्मुखम सार्व कामिकम ।। – पद्मपुराण (उत्तरखण्ड)

अर्थ : जिस मुखसे ईश्वरका नामजप होता है, वह मुख महा तीर्थक्षेत्र बन जाता है। वही हमारे शुद्धिका स्थान बन हमारी इच्छाओंकी पूर्ति करता है।



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