संतका आनंद


न तत्सुखं सुरेन्द्रस्य न सुखं चक्रवर्तिनाम् |
यत्सुखं वीतरागस्य मुनेरेकान्तवासिनः || – श्रीगुरु गीता
अर्थ
:- सारी आसक्तियोंसे मुक्त एकांतिक जीवन जीनेवाले संतका आनंद, देवताओंके राजा इंद्र, सम्राट और शक्तिशाली राज्यकर्ताओंसे भी अधिक होता है |


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution